नई दिल्ली, आइएएनएस। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम में एक दशक बाद रविवार को किसी महिला सदस्य को शामिल किया गया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के रविवार को सेवानिवृत्त होने के बाद जस्टिस आर. भानुमति को कोलेजियम में जगह मिली है।

जस्टिस भानुमति से पहले कोलेजियम में जस्टिस रूमा पाल सबसे ज्यादा तीन साल तक सदस्य रहीं। चार जून 2006 को जस्टिस पाल के सेवानिवृत्त होने के बाद कोलेजियम में कोई महिला सदस्य नहीं रहा था। वह 28 जनवरी 2006 को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुई थीं।

जस्टिस भानुमति पांच वरिष्ठ जजों में से एक

तमिलनाडु की रहने वाली जस्टिस भानुमति शीर्ष अदालत के पांच वरिष्ठ जजों में से एक हैं, इसलिए नियमानुसार वह कोलेजियम की सदस्य बनीं। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम विभिन्न हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति की सिफारिश करता है। अब जस्टिस भानुमति के साथ-साथ नामित चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस आरएफ नरीमन कोलेजियम के सदस्य हैं। जस्टिस भानुमति 19 जुलाई 2020 को सेवानिवृत्त होंगी और तब तक वह कोलेजियम की सदस्य रहेंगी।

20 जुलाई 1955 को जन्मी भानुमति का वर्ष 1988 में तमिलनाडु हायर जूडिशियल सर्विसेज में सीधा चयन हुआ। राज्य के कई जिलों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में काम करने के बाद तीन अप्रैल 2003 को उन्हें मद्रास हाई कोर्ट के जज के रूप में प्रोन्नति मिली।

झारखंड हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रहीं, कई उल्लेखनीय काम किए 

जस्टिस भानुमति ने 16 नवंबर 2013 को झारखंड हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला था। वहां उन्होंने न सिर्फ जिला अदालतों के आधारभूत ढांचे को दुरुस्त किया, बल्कि न्यायिक कर्मचारियों की कमी को दूर करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया। न्यायिक अधिकारी व कर्मचारियों की मदद के लिए उन्होंने नियमों की पुस्तिका का भी प्रकाशन करवाया। 13 अगस्त 2014 को वह सुप्रीम कोर्ट में जज बनीं। जस्टिस भानुमति के अलावा सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी दो अन्य महिला जज हैं।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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