नई दिल्ली, अनुराग मिश्र/विवेक तिवारी। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ही भारत की अवधारणा है। पर बीते सात दशकों से हमारे यहां महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं घोर निराशा में डालने वाली है। ऐसे में इस बदरंगी तस्वीर को बदलने की जरूरत है। महिलाओं पर हो रही इन घटनाओं को रोकने के लिए हमें सामूहिक तौर पर एकजुट होना होगा और दशानन रुपी इस बुराई को जड़ से मिटाना होगा।

एनसीआरबी के मुताबिक, 2020 में देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,71,503 केस दर्ज किए गए. ये आंकड़ा 2019 के तुलना में कम हुआ है. 2019 में 4,05,326 केस दर्ज किए गए थे। वहीं, 2020 में देशभर में दुष्कर्म के 28 हजार 46 केस दर्ज किए गए यानी, हर दिन औसतन दुष्कर्म के 77 केस दर्ज किए गए।

पूरे देश में 2020 में दुष्कर्म के रोज औसतन 77 मामले दर्ज किए गए और कुल 28,046 मामले सामने आए। देश में ऐसे सबसे ज्यादा मामले राजस्थान में और दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। पिछले साल पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 3,71,503 मामले दर्ज किए गए जो 2019 में 4,05,326 थे और 2018 में 3,78,236 थे।

2020 में देश में महिलाओं के खिलाफ कुल 371503 मामले दर्ज किए गए। हालांकि, क्राइम रेट की बात करें तो टॉप तीन राज्यों में राजधानी दिल्ली का नाम भी शामिल है। असम 154.3 फीसदी क्राइम रेट के साथ राज्यों की सूची में सबसे ऊपर है। दूसरे नंबर पर 112.9 फीसदी क्राइम रेट के साथ ओडिशा और 106.4 फीसदी क्राइम रेट के साथ दिल्ली तीसरे नंबर पर है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी संजय कुमार कहते हैं कि महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के मामलों में कानूनी तौर पर सख्ती आई है। मामले भी जल्द सुलझने लगे हैं। ऐसे में यह बदलाव तभी अधिक सार्थक बनेगा जब हम समाज की मानसिकता में बदलाव लाएंगे। 

Edited By: Vineet Sharan