संजय मिश्र, नई दिल्ली। 71वें गणतंत्र दिवस के मौके पर दुश्मन को सैन्य पॉवर के पराक्रम का संदेश देने के साथ भारत की सॉफ्ट पावर की ताकत से रविवार को दुनिया रूबरू हुई। राजपथ पर सैन्य व सांस्कृतिक पराक्रम के इस अनोखे संगम के बीच देश की नारी शक्ति के शौर्य का बेमिसाल स्वरूप भी नजर आया। सेना की परेड टुकड़ी का नेतृत्व जहां पहली बार युवा महिला सैन्य अधिकारी कैप्टन तान्या शेरगिल ने किया। वहीं पहली बार सीआरपीएफ के महिला मोटरसाइकिल दस्ते ने अपने हैरतअंगेज करतबों से राजपथ पर रोमांच की नई लकीर खींच दी।

गगनभेदी मिसाइलों के प्रतिरूप के बीच आसमान को चीरते हुए क्षण भर में दुश्मन को ध्वस्त करने की गर्जना का संदेश देते सुखोई और जगुआर लड़ाकू विमानों के हैरतअंगेज आसमानी करतब इसके गवाह बने लोगों के लिए अविस्मरणीय क्षण से कम नहीं रहे। गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो और उनके साथ आए विदेशी मेहमान भारत के सैन्य व सांस्कृतिक ताकत के दिलकश नजारों से रोमांचित होते रहे।

सेना के बैंड दस्तों ने राष्ट्रगान की धुन बजाई

बोलसोनारो के साथ राजपथ पर पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सबसे पहले तिरंगा लहराया तो सैना के बैंड दस्तों ने राष्ट्रगान की धुन बजाई। 21 तोपों से निकलते गोलों की गूंज तिरंगे को अपनी सलामी ठोक रहे थे तो पवित्र तिरंगे के सम्मान में वायुसेना के हेलीकाप्टरों ने आसमान से फूल बरसाए। राष्ट्रध्वज फहराये जाने के बाद सैन्य व अ‌र्द्धसैनिक बलों के दस्तों की सलामी का सिलसिला शुरू हुआ तो फिर पराक्रम की झलकियों से लेकर सांस्कृतिक विविधता के तमाम रंग राजपथ पर बिखरते नजर आए।

हजारों सैनिकों को दी गई श्रदांजलि

गणतंत्र दिवस समारोह की शुरूआत राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शहीद हजारों सैनिकों को श्रद्धांजलि देने से हुई। पीएम ने पहली बार युद्ध स्मारक पर शहीदों को नमन किया जबकि इससे पहले अमर जवान ज्योति पर यह कार्यक्रम होता रहा था। तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ इस दफा पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत भी रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ वहां मौजूद थे। युद्ध स्मारक से राजपथ पर पहुंचे पीएम मोदी ने कोविंद और बोलसोनारो के साथ उपराष्ट्रपति वैंकैया नायडु की भी अगवानी की।

वीर योद्धाओं ने राष्ट्रपति को दी सलामी

राजपथ पर करीब डेढ घंटे तक चले परेड और झांकियों के मार्च पास्ट का नेतृत्व इस बार हेडक्वार्टर दिल्ली एरिया के जनरल आफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल असित मिस्त्री ने किया। परेड के उपकमांडर मेजर जनरल आलोक कक्कड के बाद राजपथ पर परमवीर चक्र और अशोक चक्र से सम्मानित सैन्य बलों के वीर यौद्धाओं ने राष्ट्रपति को सलामी दी। इन वीर बांकुरों की मौजूदगी की गरमी का अहसास अभी थमा भी नहीं था कि सेना के मुख्य युद्धक टैंक टी-90 भीष्म, के-9 वज्र टैंक, स्वदेशी धनुष गन सिस्टम की धमक ने तालियों की गूंज बढ़ा दी।

इस बीच आकाश में एडवांस लाइट हेलीकाप्टर रुद्र और ध्रुव की उडान और नीच जमीन से आसमान में मार करने वाली आकाश मिसाइल की झलक लोगों को अपनी सीटों से खड़ा करने के लिए पर्याप्त था। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और उनकी पत्‍‌नी भी इस दौरान खुद को कुर्सी से उठने को रोक नहीं पाए। नौसेना और वायुसेना के प्रसिद्ध बैंड दस्तों के मधुर धुनों के बाद जब सेना की परेड टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए कैप्टन तानिया शेरगिल राष्ट्रपति को सलामी देने पहुंची तो राजपथ पर शायद ही किसी का हाथ ताली बजाने से रह गया हो।

वीरता पुरस्कार से सम्मानित बच्चे भी मार्च में शामिल

अंतरिक्ष में भी दुश्मन को माकूल जवाब देने के लिए बनी भारत की पहली एंटी सेटेलाइट मिसाइल के साथ डीआरडीओ की झांकी में जब रफाल और तेजस लड़ाकू विमान नजर आए तो लोग तालियों से अपना संदेश देते नजर आए। सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा की धुन बजाते आइटीबीपी के बैंड और दिल्ली पुलिस के दस्ते में शामिल छह फुट से अधिक लंबे जवानों के मार्च ने भी सबका ध्यान खींचा। प्रधानमंत्री वीरता पुरस्कार से सम्मानित वीर बच्चे भी मार्च पास्ट में शामिल हुए।

जबकि वायुसेना के लड़ाकू विमानों की आसमानी अठखेलियां और सीआरपीएफ के महिला मोटरसाइकिल दस्ते के जांबाज करतबों ने राजपथ का रोमांच चरम पर पहुंचा दिया। गणतंत्र दिवस पर पहली बार इन महिला मोटरसाइकिल सवारों ने हिस्सा ही नहीं लिया बल्कि अपने अद्भूत करतबों से हजारों लोगों की दिल की धड़कनें तेज कर दी। रफ्तार से चलती मोटरसाइकिल पर अकेले खड़ी होकर राष्ट्रपति को सलामी देने से लेकर पिस्टल चलाने और सीढि़यां चढ़ने का कमाल।

अपाचे हेलीकाप्टरों ने भी शौर्य की दिखाई झलक

इन महिलाओं के करतब का रोमांच अभी थमा भी नहीं था कि 780 किलोमीटर की रफ्तार से उड़ान भरते 5 जुगुआर विमान, तो 900 किमी की स्पीड से उड़ते सुखोई-30 जेट, सी-130 हरक्यूलस और सी-17 ग्लोब मास्टर के हैरतअंगेज करतबों ने सबको चमकृत कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी भी वायुसेना के इन विमानों के करतब को हैरत भरी निगाहों से देखते नजर आए। पहली बार शामिल हुए चिनूक हेलीकाप्टर के साथ पांच अपाचे हेलीकाप्टरों ने भी अपने शौर्य की झलक दिखाई।

सैन्य पराक्रम की झलक से पहले राजपथ पर 16 राज्यों समेत कुल 22 झांकियों से दर्शक रुबरू हुए। देश के अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति और विरासत की छटा वाली इन झांकियों में मेढ़क को संरक्षित करने का संदेश देने वाली झांकी ने सबका मन मोहा।

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