नोएडा, कुंदन तिवारी । नोटबंदी के बाद से लगातार भारत को कैशलेस सोसायटी बनाने का जो सपना केंद्र सरकार की ओर से दिखाया जा रहा है, उसकी पहल नोएडा से भी की जा रही है। नोएडा के सेक्टर-62 स्थित यूक्लियस सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट कंपनी के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट आशुतोष पांडे ने ऑफलाइन भुगतान के लिए ऐसी डिवाइस 'पैसे' का निर्माण किया है, जिसे आसानी से डिजिटल बटुआ बनाया जा सकता है। इससे ऑफलाइन कैश का आदान-प्रदान किया जा सकता है।

इस डिवाइस की खासियत यह है कि ऑफलाइन भुगतान के लिए इसमें किसी स्मार्टफोन, बैंक अकाउंट का इस्तेमाल नहीं करना प़़डेगा। उससे भी ब़़डी बात यह है कि इस डिवाइस के माध्यम से प्रतिदिन 30 बार पैसे का आदान--प्रदान करने पर भी छह माह तक इसे चार्ज करने की जरूरत नहीं होगी। इस इनोवेशन को भारतीय रिजर्व बैंक ([आरबीआई)] की इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड रिसर्च इन बैंकिंग टेक्नोलॉजी ([आईडीआरबीटी)] ने वषर्ष 2016 में बेस्ट थर्ड रैंकर्स के अवॉर्ड से सम्मानित किया है।

इस प्रकार मिला अवॉर्ड आरबीआई ने जनवरी 2016 में पेमेंट के क्षेत्र में इनोवेशन वाली कंपनियों से आवेदन कराया था। देशभर से 112 प्रविष्टियां शामिल हुई थीं, 12 कंपनियों को प्रेजेंटेशन के लिए जून 2016 में हैदराबाद बुलाया गया था, जहां कंपनी को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। म्यूजिक सिस्टम से लिया आइडिया कंपनी के फाउंडर आशुतोषष पांडे ने बताया कि यह आइडिया गानों के कैसेट से लिया गया है। जैसे एमपी थ्री के माध्यम से सीधे गाना लोगों की पहुंच में आसान हो गया है। उसी सिस्टम के जरिए 'पैसे' का आदान--प्रदान किया जा रहा है। ऐसे करेगा काम कंपनी ने लोगों की सुविधा के अनुसार डिवाइस के साथ-साथ चिप व कार्ड भी भुगतान के लिए बनाया है।

कंपनी की तैयार चिप को बैंक से मिले नंबर से अटैच कर चिप के माध्यम से डिवाइस, कार्ड में फिट कर दिया जाता है। इसके बाद यह आप का बटुआ बन जाता है। इसमें आप सहूलियत के हिसाब से 100, 200, 500, 1000 रपए रख सकते हैं। इसके बाद डिवाइस टू डिवाइस, कार्ड टू डिवाइस, चिप टू डिवाइस से आसानी से पैसे का लेन--देन कर सकते हैं। इसी नंबर पर आप को कोई भी कहीं से ऑनलाइन पैसा भी डिवाइस, कार्ड या चिप पर भेज सकता है। रिमोट एरिया में सफल परीक्षण न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट कंपनी के हेड-आपरेशन एंड सप्लाई चेन अनिल बाजपेयी ने बताया कि हरियाणा के रेवाड़ी और राजस्थान के कोटा में कई ऐसी जगह है, जहां आज भी बैंक या एटीएम नहीं है।

कंपनी ने अपनी डिवाइस 'पैसे' का यहां पर सफल परीक्षण किया है। कई सेल्फ हेल्प ग्रुप ने इस डिवाइस से ऑफलाइन भुगतान कर रहे हैं। कई जगह तो रिकवरी एजेंट भी इसका इस्तेमाल पैसों के आदान--प्रदान में कर रहे हैं। आसान रजिस्ट्रेशन, बैंक लोन हर व्यक्ति के पास आधार नंबर या मतदाता पहचान पत्र अवश्य होता है। उसके आधार पर कंपनी 30 सेकंड में फ्री रजिस्ट्रेशन कर देती है। इसी रजिस्ट्रेशन पर यस बैंक एक नंबर अलाट कर देती है। कंपनी के साथ बैंक का एस्क्रो अकाउंट है। इस नंबर के माध्यम से वह अपने खाते में पैसे का आदान--प्रदान कर सकता है। कंपनी उसके ट्रांजेक्शन के बाद लोन का स्कोर भी तैयार कर रही है। नंबर व कलर से पेमेंट अनप़़ढ भी पैसे के लेन देने में केवल रंग जानते हैं। ऐसे में कंपनी ने उन्हीं को ध्यान में रखकर कलर व नंबर की डिवाइस बनाई है। इसमें काले व नीले रंग से पेमेंट देने व रिसीव का ऑप्शन दिया गया है।

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Posted By: Sachin Bajpai

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