नई दिल्ली (जेएनएन)। टैक्स... एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। इसका कारण है कि आयकर कानूनों में कई सारे पेंच। आमतौर पर इन्हें समझना किसी के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो जाता है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है ऐसे में यहां हम आपको उन सवालों के जवाब देंगे जिन्हें समझने में आपके सामने काफी मुश्किलें सामने आती होंगी। जैसे- फॉर्म 16 के बिना आईटीआर कैसे भरा जा सकता है? फॉर्म 16 न होने पर क्या रिटर्न भरना जरुरी है? सालाना 2.5 लाख से कम सैलरी होने पर रिटर्न भरने की जरुरत है कि नहीं?

हालांकि फॉर्म 26एएस को जरुर देखना चाहिए। मासिक वेतन या आय को 12 से गुणा कर रिटर्न भरा जा सकता है। फॉर्म 26एएस को जांच ले कि टीडीएस कटा है या नहीं। शेयरों की खरीद- बिक्री, अन्य आय की जानकारी जरुर दें। सभी तरह के निवेश की जानकारी साझा कीजिए। फॉर्म 26एएस के जरिए टैक्स देनदारी में थोड़ी कटौती होगी। इनकम टैक्स की वेबसाइट पर जाकर बाकी बची राशि का भुगतान करें।

कई बार कर्मचारियों को बैंक खाते में मिलने वाली रकम का पता पासबुक द्वारा मिल जाता है लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि उनकी सैलरी से टीडीएस के मद में कितनी रकम नियोक्ता द्वारा आयकर विभाग के खाते में जमा की गई है। हर वित्तीय वर्ष के अंत में कर्मचारी अपने कार्यालय से फार्म 16 प्राप्त करते हैं। इस फार्म में उन्हें पूरे वर्ष में मिलने वाली सैलरी का पूरा ब्योरा होता है। साथ ही इस फार्म में यह भी जानकारी होती है कि उनके नियोक्ता ने टीडीएस के मद में कितना भुगतान किया है।

क्या है टीडीएस?
आयकर अधिनियम के आधार पर आय के विभिन्न मद हैं। इनमें वेतन, गृह संपत्ति से आय, कारोबार व व्यवसाय, पूंजी अभिलाभ एवं स्रोत से आय शामिल है। आमतौर पर जब किसी व्यक्ति को आय होती है तो उक्त आय पर आयकर का भुगतान या तो अग्रिम कर या स्वयं आकलन करके किया जाता है। इस प्रकार काटा गया कर सरकार के पास जमा होता है। कर कटौती का यह रूप स्रोत पर कर की कटौती (टीडीएस) कहलाता है।

जो व्यक्ति कर की कटौती करता है उसे कटौती क्रेता और जिस व्यक्ति का कर काटा जाता है उसे डिडक्टी कहा जाता है। स्रोत पर कर की कटौती करने वाले व्यक्ति को एक विशिष्ट संख्या प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। जिसे कर कटौती खाता संख्या (टैन) कहा जाता है। अधिकारियों ने बताया कि कर की कटौती में चूक के मामले में एक प्रतिशत प्रति माह या उसके भाग के लिए ब्याज लगाया जाता है। यदि कर की कटौती के बाद कर का भुगतान होने में विलंब होता है तो डेढ़ प्रतिशत प्रति माह या उसके भाग के लिए ब्याज लगाया जाता है।

सैलरी पर टीडीएस
वो लोग जिनकी आय कर की सीमा से ज्यादा होती है नियोक्ता उनकी कुल आय पर से टीडीएस कटौती करता है। इसमें सभी कटौती और छूट के बाद आय के अलावा अन्य आय शामिल होती है। टीडीएस इनकम स्लैब के आधार पर कटौती योग्य होता है। वहीं इसे टाला भी जा सकता है अगर आप 80सी और 80डी के दायरे में आने वाले विकल्पों में निवेश करते हैं। इसके लिए आपको इन्वेस्टमेंट के प्रूफ भी देने होते हैं। कंपनियां वित्त वर्ष के अंत में एक टीडीएस प्रमाणपत्र जिसे फॉर्म 16 के रूप में भी जाना जाता है, जारी करती हैं।

टीडीएस कटने पर जमा करना होगा आयकर विवरणी
यदि आपका टीडीएस कटा है तो आपको आयकर रिटर्न फाइल करनी होगी। नहीं तो आप पर पेनाल्टी लग सकती है। आयकर विभाग लोगों को टीडीएस कटाने के बाद भी रिटर्न फाइल नहीं करने पर एसएमएस के जरिए संदेश भेज सकता है। साथ ही ऐसे लोगों को भी संदेश भेज सकता है, जिन्होंने पहले रिटर्न फाइल की थी मगर अब नहीं की। विभागीय अधिकारियों के अनुसार बैंक ब्याज, किराया राशि, ठेकेदारी, कमीशन एजेंट, ट्रांसपोर्ट व सर्विस फीस लेने वाले तमाम पेशेवर टीडीएस के दायरे में आते हैं।

By Srishti Verma