यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 02, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मप्र में सिखों के साथ मारपीट के मामले में शाह से मिलेंगे सिख नेता
श्योपुर में सिखों के साथ मारपीट के बाद समाज के लोगों में उबाल आ गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री कमनलाथ पर सिखों का उत्पीड़न कराने का आरोप लगाया है।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश सरकार के इशारे पर वहां सिखों के साथ मारपीट की जा रही है। उन्हें बेघर करने की साजिश हो रही है। इस मामले को लेकर कमेटी के नेता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलेंगे। साथ ही एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को मध्य प्रदेश जाकर पीड़ित परिवारों से मिलेगा।
डीएसजीपीसी कार्यालय में प्रेस वार्ता में अध्यक्ष मनिंदर सिंह सिरसा, महासचिव हरमीत सिंह कालका व अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ सिखों के खिलाफ हैं। उन्होंने एक समूह को सिखों को राज्य से निकालने की मुहिम चलाने की छूट दे रखी है। श्योपुर जिला के करलाह तहसील में सिखों के घर गिराने के साथ ही अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। 12 सौ एकड़ से ज्यादा रकबे में लगी फसल तबाह कर दी गई है।
राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ीं
इस घटना के बाद मध्य प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। विपक्षी दल इसका लाभ उठाने के लिए अपनी चालें चलने लगे हैं। उधर मध्य प्रदेश के मनासा कस्बे में बुधवार को बुधवार को पंजाब किसान यूनियन ने बस स्टैंड पर मध्य प्रदेश सरकार का पुतला जलाया। यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पंजाबी सिख किसानों के घर गिराने और उनकी फसलें नष्ट करने के विरोध में किया गया। पंजाब किसान यूनियन के सूबा प्रधान रुलदू सिंह मानसा और महासचिव गुरनाम सिंह भीखी ने कहा कि मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ का सिखों के प्रति पहले भी बुरा रवैया रहा है।
मुख्यमंत्री पर 84 के दंगों की आंचः
मुख्यमंत्री कमनलाथ पर 84 के दिल्ली दंगों के दौरान भी सिखों के खिलाफ तोड़फोड़ के आरोप लगते रहे हैं और अब भी उन्होंने सिख किसानों के घर गिराकर अपने सिख विरोधी रवैए का प्रदर्शन किया है।
सूबा प्रधान ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के सिख किसानों ने लगभग तीन दशक पहले मध्य प्रदेश की तहसील करहाल के गावों में बंजर पड़ी जमीन को अपनी मेहनत से कृषि योग्य बनाया और वहां अपने मकान बनाकर अपनी रिहायश की। वहीं मध्य प्रदेश के प्रशासन ने दशकों की मेहनत के साथ बनाए उनके घर और बोई फसल को मिट्टी में मिला दिया।
उन्होंने मांग की कि कांग्रेस की तरफ से मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य मंत्री से त्यागपत्र लिया जाएं, उजाड़े गए पंजाबी किसानों के घर सरकारी खर्च पर बनाकर दिए जाएं और उनकी फसल की किये नुक्सान की भरपाई की जाए। इस अवसर पर सूबा प्रेस सचिव बलकरन सिंह बल्ली, खजांची कामरेड नछत्तर सिंह, बूटा सिंह रंधावा, स्वर्ण सिंह, सुखदेव सिंह लेहल, रामफल बुशैहरा (संगरूर), मलकीत सिंह भदौड़, मोहन सिंह रूड़ेके (बरनाला) आदि नेता उपस्थित थे।
