नई दिल्ली, जेएनएन। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उड़ीसा में बीजेपी के पास एक मात्र सीट थी मगर इस बार आए एग्जिट पोल के अनुसार उड़ीसा में बीजेपी को 15 सीटें मिलती दिख रही है। यदि भाजपा को यहां से इतनी सीटें मिलती है तो उसके लिए ये एक बड़ी उपलब्धि होगी और सरकार बनाने में यहां की सीटें महत्वपूर्ण रोल निभाएंगी।

भाजपा ने 2014 के बाद से ओडिशा पर ख़ास ध्यान दिया है जिसकी वजह से उन्हें इस बार ये अधिक सीटें मिलने की संभावना एग्जिट पोल में बताई गई है। दरअसल पिछले कई सालों से प्रदेश में भाजपा की राजनीतिक साख कमज़ोर रही है। क़रीब 10 वर्ष पहले तक तो नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (बीजेडी) से पार्टी का गठबंधन था, उन दिनों प्रदेश में भाजपा से ज़्यादा लोग बीजेडी को ही जानते थे। पिछले आम चुनावों में भी भाजपा को ओडिशा में करारी शिकस्त मिली थी।

प्रदेश की 21 लोक सभा सीटों में से पार्टी के पास मात्र एक सीट है और 147 सदस्यों वाली विधान सभा में बमुश्किल से 10 विधायक हैं। अगर विधायकों की बात हो तो कांग्रेस के पास भाजपा से ज़्यादा विधायक हैं। मगर इस बार के चुनाव में भाजपा ने यहां काफी मेहनत की, पार्टी के कई बडे़ नेताओं ने यहां रैलियां की जिसकी वजह से भाजपा को ये बढ़ी हुई सीटें मिलने की उम्मीद है। साल 2014 के चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी कैबिनेट में ओडिशा के दो नेताओं, धर्मेंद्र प्रधान और जुअल ओरम, को जगह मिली और निर्देश भी कि 'मिशन ओडिशा' अब अगला पड़ाव है। इसी के तहत यहां पर काम शुरू किया गय़ा। इस प्रदेश के लिए तमाम बड़े फैसले दोनों नेता ही लेते रहे।

ओडिशा में 21 लोकसभा सीटों के लिए मतों की गणना जारी है और अब तक मिले रुझानों के मुताबिक बीजद 13 सीटों पर, बीजेपी तीन सीटों पर और कांग्रेस दो सीटों पर आगे चल रही है। पार्टी नेता धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक़, "बीते पांच साल में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बार-बार ओडिशा का दौरा किया है और ज़िला स्तर तक पहुंचे हैं, पार्टी के संगठन के विस्तार की बड़ी योजना बनाई, समाज के हर वर्ग के लोगों को पार्टी से जोड़ा है." हक़ीक़त यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले कुछ सालों के दौरान ओडिशा में दो दर्जन से ज़्यादा रैलियां की हैं.

भाजपा की इस रणनीति का कुछ नतीजा तब दिखा जब 2017 के पंचायत चुनावों में पार्टी को प्रदेश में पहले से कहीं ज़्यादा सीटें मिली। यही वजह है कि पार्टी ने पूरे प्रदेश में पूरे जोश के साथ लगी हुई है। इस बार के चुनाव में दूसरी दिलचस्प बात ये रही कि भाजपा के नरेंद्र मोदी वाले लगभग सभी बैनर-होर्डिंग वग़ैरह के पास ही बीजू जनता दल प्रमुख और ओडिशा में 19 साल से मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक के भी बैनर देखे गए जिससे वोटरों का इस ओर रूझान बढ़ा। प्रदेश में बीजू जनता दल का कई दशकों से संगठनात्मक तरीक़े से काम होता रहा है तो नवीन पटनायक का कैडर काफ़ी फैला हुआ है. इसमें भी कोई शक नहीं कि वे लगभग दो दशक से प्रदेश के सबसे लोकप्रिय नेता भी हैं। 

 

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Posted By: Vinay