नेशनल डेस्क, नई दिल्ली: भारत की विशाल जनसंख्या के लिए बेहतर व आर्थिक रूप से वहन करने योग्य स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना अत्यंत दुरूह कार्य सरीखा है। आयुष्मान भारत व स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण के साथ भारत बीते सात-आठ वर्ष में इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। चिकित्सा क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यही वह सेवा होती है जहां किसी मरीज का जान बचाने या गंभीर दिव्यांगता से बचाने का उपक्रम सबसे पहले होता है।

भारत सरकार ने बुधवार को इसी सेवा को मजबूत करने के लिए नेशनल लाइफ सपोर्टस कोर्सेज यानी एनएलएससी का शुभारंभ किया है। आइए समझे आपातकालीन चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में भारत की क्या स्थिति है और कैसे इसमें सुधार हो सकता है:

यह हैं इमरजेंसी सेवा के कम प्रभावी होने के कारण

  • भारत में आपातकालीन चिकित्सा सेवा के बेहतर होने का सिलसिला असमान रहा है। कुछ राज्यों ने इस क्षेत्र में अच्छा काम किया है जबकि कुछ अभी शैशवकाल में ही हैं।
  • इसका मुख्य कारण चिकित्सा सेवा का प्री-हास्पिटल सेवा से लेकर अस्पताल के भीतर होने वाले उपचार में बंटा होना है।
  • इसके अलावा आपातकालीन सेवा क्षेत्र में प्रशिक्षित स्टाफ की कमी, नियमन और वित्त की कमी भी बड़े कारण हैं।
  • आपात चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए अलग से अकादमिक कोर्स की कमी भी एक अहम कारक है।

सड़क दुर्घटना से अधिक मौतें

  • भारत में कुल मौतों में सड़क दुर्घटना के कारण होने वाली मौतों की संख्या काफी अधिक है। देश में होने वाली कुल मौतों में से 62 प्रतिशत गैर संक्रमणीय बीमारियों के कारण होती हैं जबकि संक्रमणीय बीमारियों, मातृत्व व नवजात के मामले में 27 प्रतिशत मौतें होती हैं।
  • दक्षिण एशियाई देशों में दिव्यांगता के कारण जीवन प्रभावित होने के 84 प्रतिशत से अधिक मामले इमरजेंसी और ट्रामा की स्थितियों के कारण होते हैं।
  • इसमें देश में 34 स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों की रियल टाइम चेकिंग की गई जिसमें 300 बेड से अधिक वाले 15 जिला अस्पताल और 300 बेड से कम वाले 19 जिला अस्पतालों को शामिल किया गया।

ऐसी मिली इमरजेंसी चिकित्सा सेवा की स्थिति

  • किसी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में आने वाले कुल मरीजों में 16 प्रतिशत इमरजेंसी या चोट के मामलों वाले होते हैं।
  • अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या का 19 से 36 प्रतिशत तक इमरजेंसी या चोट वाले मरीज होते हैं।
  • किसी भी दिन अस्पताल के वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में आने वाले कुल मरीजों में करीब 12 प्रतिशत इमरजेंसी मामले होते हैं।

अस्पताल की आपातकालीन सेवा में आने वाले मरीजों में

  • बुखार के 29 प्रतिशत
  • पेट दर्द के 22 प्रतिशत
  • ट्रामा और सड़क दुर्घटना के 18 प्रतिशत

बच्चों में यह आंकड़ा इस प्रकार है

  • डायरिया के 6 प्रतिशत
  • ट्रामा और सड़क दुर्घटना के 5 प्रतिशत मरीज होते हैं

Edited By: Sanjay Pokhriyal