नई दिल्ली, जेएनएन। भारत में लंबी दूरियां तय करने के लिए ज्यादातर लोग भारतीय रेलवे का सहारा लेता है। छुक छुक चलती रेल गाड़ी लोगों को सकुशल उनके गंतव्य पहुंचाती है। रेलवे स्टेशन से लेकर रेलवे प्लेटफार्म और रेलगाड़ी तक बहुत सारी ऐसी चीजें हैं, जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे।

इन सब में एक और अहम बात है, वो यह है कि जब आप कभी रेलवे से सफर करते हैं तो आपने यह जरूर गौर किया होगा कि रेलवे की पटरियों पर आग लगाई जाती है, आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है। आइए आपको खबर के माध्यम से समझाते हैं कि ऐसा करने के पीछे की आखिर क्या वजह होती है।

जानबूझकर रेलवे कर्मचारी लगाते हैं यह आग

आपको जानकर हैरानी होगी कि यह आग जानबूझकर रेलवे कर्मचारियों द्वारा लगाई जाती है। आग लगाने के पीछे की वजह होती है हादसे से बचाव। जी हां रेलवे ट्रैक कई पटरियों को जोड़कर तैयार किया जाता है। रेलवे ट्रेन कभी भी कोई लंबा ट्रैक नहीं बिछाती है। कुछ किलोमीटर के अंतराल पर दो पटरियों को फिश प्लेट की मदद से जोड़ा जाता है। इन पटरियों के बीच कुछ दूरी भी रखी जाती है। यही प्रक्रिया पूरी रेलवे ट्रैक पर अप्लाई होती है।

दो पटरियों को पूरा जोड़ने पर

आपको बता दें कि यदि दो पटरियों को एक साथ पूरा जोड़ दिया जाए तो क्या होगा। दरअसल, रेलवे की पटरियों पर मौसम का बड़ा प्रभाव पड़ता है। गर्मी के मौसम में रेलवे की पटरियां फैलती हैं और सर्दी के मौसम में ये सिकुड़ती हैं। ऐसे में यदि रेलवे इन दोनों पटरियों को पूरी तरह से एक साथ मिलाकर जोड़ दे, तो पटरियों को फैलने की जगह नहीं मिलेगी, जिससे सारी व्यवस्था चरमरा जाएगी। किसी ऐसी स्थिति में पटरियों में क्रैक आ सकते हैं पर यदि ऐसा होता है तो एक बड़ी ट्रेन दुर्घटना हो सकती है।

ट्रैक पर आग लगाने के पीछे की वजह

रेलवे ट्रैक की लोहे की पटरियां तापमान कम होने पर सिकुड़ती हैं। यही कारण है कि रेलवे के कर्मचारी रेलवे पटरियों के ज्वाइंट पर कुछ दूरी तक आग लगाते हैं, जिससे पटरियां गर्म हो जाए और इनके सिकुड़ने का डर ना हो।

किस तरह लगाई जाती है आग

आपको बता दें कि रेलवे की पटरियों पर अनोखे ढंग से आग लगाई जाती है। रेलवे कर्मचारी एक कपड़े को मिट्टी के तेल या डीजल में भिगोकर रेलवे पटरियों के किनारे रख देते हैं और कुछ देर तक उन्हें यूं ही जलने देते हैं। कुछ देर आग लगे रहने से पटरियां गर्म हो जाती हैं और उनमें क्रैक आने की संभावना कम हो जाती है। हालांकि, इस दौरान यह भी ध्यान दिया जाता है कि पटरियों पर अधिक समय तक आग न जले।

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Edited By: Ashisha Singh Rajput

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