यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Agnipath Scheme पर युवा क्यों उठा रहे सवाल, बिहार समेत देश के कई हिस्सों में बवाल, जानें इसके फायदे और नुकसान
अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष के युवाओं को सेना के तीनों अंगों यानी थलसेना वायुसेना और नौसेना ...और पढ़ें

आनलाइन डेस्क, नोएडा। सेना में भर्ती के लिए केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना Agneepath Scheme के विरोध में बिहार से उठा बवाल आज देश के कई शहरों तक पहुंच गया। बीते दिन केंद्र सरकार ने Agneepath Scheme के फायदे गिनाए। गृहमंत्री अमित शाह ने खुद आगे आकर कहा, 'अग्निपथ' योजना से प्रशिक्षित युवा देश की सेवा और सुरक्षा में योगदान दे सकेंगे।'अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष के युवाओं को सेना के तीनों अंगों यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना में चार साल के लिए भर्ती किया जाएगा, जो अग्निवीर कहलाएंगे।
चार साल बाद इनमें से 25 प्रतिशत को आगे की सेवा के लिए रखा जाएगा, बाकी को एकमुश्त करीब 12 लाख रुपये देकर बाहर कर दिया जाएगा। वहीं, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने अग्निपथ योजना की प्रशंसा करते हुए अग्निवीरों को पुलिस सहित अन्य भर्ती में प्राथमिकता देने की बात कही। इन सबके बावजूद युवा Agneepath Scheme से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे। उन्होंने योजना को लेकर कई सवाल उठाए हैं। जानें, युवा क्यों कर रहे Agneepath Scheme का विरोध, क्या है उनके सवाल?
प्रदर्शनकारी युवाओं के सवाल
- जयपुर में प्रदर्शनकारियों में शामिल युवक रामकेश व राकेश ने बताया कि केंद्र सरकार की इस योजना के चलते सेना में स्थाई भर्ती की जगह संविदा के तौर पर भर्ती होगी, जोकि हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिससे सालों से सेना में भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के साथ धोखा होगा । इस योजना से न सिर्फ युवाओं को नुकसान होगा,बल्कि सेना की गोपनीयता एवं विश्वसनीयता भी भंग हो सकती है। केंद्र सरकार को इस योजना को बंद कर पहले की तरह भर्ती प्रक्रिया को शुरू करना चाहिए। कुछ लोगों का मानना है कि सरकार ने यह कदम वेतन और पेंशन का बजट कम करने के लिए उठाया है। गौरतलब है कि प्रदर्शनकारियों में अधिकांश युवा वह हैं जो सेना में भर्ती होने के लिए काफी पहले से तैयारी में जुटे थे। नई भर्ती प्रक्रिया से उनका धैर्य टूट गया।
- बिहार में Agneepath Scheme का विरोध कर रहे युवाओं को कई बातों की चिंता है। उनका कहना है कि वे सेना में जाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। इसके बाद भी अगर चार साल की नौकरी ही मिले तो इसका क्या फायदा। सरकार हमें ऐसे रास्ते पर छोड़ देगी, जहां से हमें कोई रास्ता नहीं मिलेगा। इसलिए सरकार पुरानी प्रणाली ही कायम रखे। इस तरह का अग्निवीर हमें नहीं बनना।
- प्रदर्शनकारी युवाओं का ये भी कहना है कि सरकार केवल चार साल की नौकरी देगी। न तो पेंशन का लाभ मिलेगा न ग्रैच्युटी का। चार साल के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही नौकरी दी जाएगी, शेष 75 प्रतिशत को अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया जाएगा। ऐसे में जो अग्निवीर 17 साल की उम्र में नौकरी में आएंगे, वे 21 साल की उम्र में बेरोजगार हो जाएंगे। उनके पास न तो प्रोफेशनल डिग्री होगी, न विशेष योग्यता। ऐसे में वे दर-दर की ठोकरें खाएंगे। युवाओं का कहना है कि शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में भी 10 से 12 साल की नौकरी होती है। फिर सरकार यह कौन-सी व्यवस्था कर रही है।
- उत्तराखंड के बागेश्वर में अग्निपथ योजना पर युवा वर्ग ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ मंजूर नहीं है। उन्हें चार वर्ष की सेवा नहीं करनी है। गुरुवार को जिलेभर के युवा कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जमकर नारेबाजी की। पिछले दो वर्ष पूर्व युवाओं ने फिजिकल व मेडिकल टेस्ट पास किया। उनकी परीक्षा होनी थी। सरकार ने अभी तक उस पर रोक लगाई है। टीओडी लागू होने के बाद युवाओं की आर्मी परीक्षा रद्द कर दी गई है।
Agneepath Scheme के फायदे
- वायुसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख एयर मार्शल श्रीकुमार प्रभाकरण ने कहा कि अग्निपथ योजना केवल फौजी बनने के इच्छुक युवाओं के सपनों को ही पूरा नहीं करेगी, बल्कि युवाओं को नकारात्मक गतिविधियों व राष्ट्रविरोधी तत्वों के चंगुल में फंसने से भी बचाएगी। जम्मू कश्मीर में यह युवाओं को धर्मांध जिहादी मानसिकता से भी बचाएगी।युद्ध के तौर तरीकों में आ रहे बदलाव की चुनौतियों के बीच अब वही भारतीय सेना में शामिल होगा, जो चार वर्ष के अग्निपथ पर सफलतापूर्वक चलेगा। उन्होंने कहा कि यह योजना राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह सजग आदर्श नागरिक भी तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना को करीब दो वर्ष तक विचार विमर्श करने के बाद ही लागू किया जा रहा है। मेरी राय में यह बहुत ही व्यावहारिक, प्रभावी और आदर्श योजना है।
- सेना की उत्तरी कमान के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों और राष्ट्र के लिए एक परिवर्तनकारी सुधार है। इसका उद्देश्य सेना के मानव संसाधन प्रबंधन में आमूलचूल परिवर्तन लाना है। इससे उत्तरी कमान की आपरेशनल तैयारियों को ताकत मिलेगी। यह योजना युवाओं को अनुशासित और बेहतर नागरिक बनाने में मदद करेगी। इस योजना से युवाओं को सेना में भर्ती होकर देशसेवा करने का स्वर्णिम अवसर मिलेगा।
फिलहाल वायुसेना में महिलाओं को अवसर नहीं
वायुसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख एयर मार्शल श्रीकुमार प्रभाकरण ने कहा कि अग्निपथ योजना में महिला सैनिकों को भी उनकी योग्यता और संबंधित नियमों के तहत अवसर मिलेगा। वायुसेना में हम फिलहाल उन्हें इस योजना के तहत अवसर नहीं दे रहे हैं, क्योंकि इसके लिए कुछ बु़नियादी ढांचागत सुविधाएं चाहिए। भविष्य में जल्द ही ऐसा हो सकता है।
पहले साल किस सेना में कितने अग्निवीर
- अगले छह महीने में थलसेना 25,000 अग्निवीरों की भर्ती करेगी- उसके बाद शेष 15,000 अग्निवीरों को भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू होगी
- - नौसेना पहले साल 3,000 अग्निवीरों को लेगी
- - वायुसेना भी पहले साल इस योजना के तहत 3,500 अग्निवीर भर्ती करेगी
'अनिग्नपथ' से एनसीसी कैडेट को मिलेगा बेहतर मौका
एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल गुरबीरपाल सिंह ने नागपुर में कहा कि अग्निपथ योजना से नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडट को बेहतर मौके मिलेंगे। उन्होंने कहा कि एनसीसी के 'बी' और 'सी' सर्टिफिकेट वाले कैडेट को सशस्त्र बलों में भर्ती में विशेष वेटेज मिलेगा।
अग्निवीरों के लिए विशेष डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करेगा शिक्षा मंत्रालय
शिक्षा मंत्रालय अग्निवीरों के लिए तीन साल का कौशल आधारित विशेष डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करेगा। इसमें सेना में चार साल के कार्यकाल के दौरान मिले प्रशिक्षण के लिए 50 प्रतिशत अंक दिए जाएंगे। यह स्नातक डिग्री पाठ्यक्रम इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) द्वारा शुरू किया जाएगा। यह डिग्री देश और विदेश दोनों जगह नौकरी और उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए मान्य होगी। इग्नू और सेना के तीनों अंगों के बीच जल्द ही इस संबंध में एक समझौता किया जाएगा।
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