नई दिल्‍ली, एजेंसियां। डब्‍ल्‍यूएचओ की सलाहकार समिति ने दक्षिण अफ्रीका में पहली बार पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट को बेहद संक्रामक और चिंताजनक प्रकार करार दिया है। इसे ओमीक्रान नाम दिया गया है। इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ ने दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के देशों में निगरानी बढ़ाने, सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने और टीकाकरण कवरेज बढ़ाने की सलाह दी है। वैश्विक स्वास्थ्य निकाय ने उत्सवों और समारोहों में सभी एहतियाती उपाय अपनाने के साथ ही भीड़ और बड़ी सभाओं से बचने को कहा है।

जारी रखनी होगी लड़ाई, बचाव ही उपाय

दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक डा . पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि इस वैरिएंट को लेकर निराश होने की जरूरत नहीं है। भले ही दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकांश देशों में COVID-19 मामलों में गिरावट आ रही है लेकिन दुनिया के दूसरे हिस्‍से में वैरिएंट आफ कंसर्न के नए वायरस का मिलना जोखिम का एहसास कराता है। कोरोना को हराने को लेकर हमें अपना काम जारी रखने की आवश्यकता है। वायरस से बचाव ही सबसे अच्छा तरीका है।

बाहरी मुल्‍कों से आने वाले जोखिमों की ओर इशारा

उन्होंने कहा कि देशों को सतर्कता और निगरानी बढ़ाना चाहिए और फैल रहे वैरिएंट के बारे में ताजा जानकारी के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के माध्यम से आने वाले जोखिम का आकलन करना चाहिए। साथ ही इससे बचाव के हर संभव कदम उठाना चाहिए। यही नहीं संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सामाजिक उपायों को जारी रखना चाहिए। सबसे पहले सुरक्षात्मक उपायों को लागू किया जाए। डा. खेत्रपाल ने कहा कि आने वाले समय में वायरस में और बदलाव होंगे। यह महामारी अधिक समय तक चलेगी।

आम आदमी को बताए ये उपाय

डा. खेत्रपाल ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि लोग मास्क पहने, सुरक्षित दूरी बनाए रखें, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, हाथ साफ रखें, किसी दूसरे व्‍यक्ति की खांसी और छींक के संपर्क में आने से बचने के लिए खुद को कवर करें। समय पर टीका लगवाएं। उन्‍होंने बताया कि क्षेत्र की लगभग 48 फीसद लोगों को अभी तक COVID-19 वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं लगाई जा सकी है। जाहिर सी बात है कि यह संक्रमण के जाखिमों को बढ़ाता है।

वायरस आफ कंसर्न

मालूम हो कि भारत समेत विश्व के कई देशों में भीषण तबाही मचाने वाले कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट से भी ज्यादा खतरनाक बताए जाने वाले इस नए वैरिएंट को लेकर डब्ल्यूएचओ की सलाहकार समिति की शुक्रवार को बैठक हुई। संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी डब्ल्यूएचओ ने इसे 'वायरस आफ कंसर्न' के रूप में वर्गीकृत किया है। इस श्रेणी के वायरस को अत्यधिक संक्रामक माना जाता है। डेल्टा वैरिएंट को भी इसी श्रेणी में रखा गया था।

टीका लगने के बाद भी रहें सावधान

इस वैरिएंट को लेकर बेहद ज्‍यादा जोखिम बताए जा रहे हैं। डा. खेत्रपाल ने सुझाव दिया कि टीका लगवाने के बाद भी सभी लोगों को सावधानी बरतनी होगी। यही वजह है कि गंभीर होते हालात को देखते हुए और भी कई देशों में इस वैरिएंट को आने से रोकने के लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। गौर करने वाली बात है कि शोधकर्ता यह समझने के लिए लगातार काम कर रहे हैं कि यह वैरिएंट कितना खतरनाक है। चिकित्सा विज्ञान और टीकों को कैसे चुनौती देगा।

दहशत में दुनिया

इस वैरिएंट के सामने आने से पहले ही ब्रिटेन, जर्मनी और रूस समेत यूरोप और अन्य क्षेत्रों के कई देशों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे थे। रूस में तो इस महामारी के चलते रिकार्ड संख्या में लोगों की मौतें भी हो रही थीं। अब इस नए वैरिएंट के सामने आने के बाद दुनिया में दहशत फैल गई है। ब्रिटेन, इटली और इजरायल समेत कई देशों ने दक्षिण अफ्रीका, लेसेटो, बोत्सवाना, जिम्बाब्वे, मोजांबिक, नाबिया और इस्वातिनी के लिए उड़ानें बंद कर दी हैं।

कई देशों ने उठाए सख्‍त कदम

नीदरलैंड समेत और कई देश इसी तरह के उपाय करने पर विचार कर रहे हैं। जर्मनी भी इन देशों के लिए उड़ानों पर पाबंदी लगा सकता है। जापान ने कहा है कि शुक्रवार के बाद से इन देशों से आने वाले लोगों को सरकारी क्वारंटाइन सेंटरों में 10 दिन अनिवार्य रूप से रहना होगा। इस दौरान उनकी तीन बार कोरोना जांच भी की जाएगी। दक्षिण अफ्रीका से आने वाले यात्रियों में बोस्तवाना और हांगकांग में यह वैरिएंट पाया गया है। इजरायल में भी मलावी से आए एक व्यक्ति को इससे संक्रमित पाया गया है।