कन्हैया झा। इस पुस्तक के शीर्षक को पढ़कर सबसे पहले यही उत्सुकता जन्म लेती है कि आखिर ऐसा कौन व्यक्ति है, जो दुनिया का सबसे खुशहाल व्यक्ति है? इसके साथ ही यह उत्सुकता भी जागती है कि आखिर वे कौन से मानदंड हैं, जिनसे इस बात का मूल्यांकन हो सकता है कि वह दुनिया का सबसे खुशहाल इंसान है। अपनी इन्हीं उत्सुकताओं और जिज्ञासाओं के लिए आपको यह पुस्तक पढऩी चाहिए।

पिछली सदी में यूरोप में नाजियों और यहूदियों के बीच हुए संघर्ष से आप परिचित होंगे। आप यह भी जानते होंगे कि वर्ष 1933 में हिटलर के सत्ता में आने के बाद जर्मनी में किस तरह से यहूदियों के खिलाफ हिंसा को अंजाम दिया गया था। इसका शिकार रहे एक व्यक्ति अब्राहम सालोमन जकुबोविक्ज, जिन्हें उनके दोस्त एडी जाकु के नाम से पुकारते थे, ने अपनी दास्तां इसमें बयां की है। एडी जाकु हमेशा स्वयं को पहले जर्मन और फिर यहूदी मानते थे। उन्हें अपने देश पर गर्व था, लेकिन नवंबर, 1938 में उस समय सबकुछ बदल गया, जब उन्हें न केवल बुरी तरह से पीटा गया, बल्कि गिरफ्तार करते हुए यातना-शिविर में ले जाया गया।

अगले सात वर्षों तक एडी का लगभग हर दिन अकल्पनीय भय और संत्रास के बीच बीता। इस बुरे दौर में उन्होंने अपने परिवार, अपने दोस्त और अपने देश तक को खो दिया। चूंकि एडी को गंभीर यातना से मुक्ति मिल गई, इसलिए उन्होंने हर दिन मुस्कुराने की कसम खाई। वह मारे गए उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं- अपनी आपबीती सुनाकर, अपना ज्ञान साझा करके और अपना सर्वोत्तम संभव जीवन जीकर। इतनी बड़ी मुसीबतों को सहने के बाद वह स्वयं को दुनिया का सबसे खुशहाल इंसान मानते थे।

एडी के निधन के कुछ ही समय पूर्व उनके द्वारा लिखा गया यह संस्मरण बेहद मार्मिक होने के साथ ही अत्यंत प्रभावशाली और दिल को छू लेने वाला है और किसी भी निराश-हताश हो चुके व्यक्ति के भीतर एक नवीन आशा का संचार करने वाला है। इस पुस्तक का अनुवाद यामिनी रामपल्लीवार ने बेहतर तरीके से किया है, जो बेहद पठनीय है।

पुस्तक : दुनिया का सबसे खुशहाल इंसान

लेखक : एडी जाकु

प्रकाशक : मंजुल पब्लिशिंग हाउस

मूल्य : 299 रुपये

Edited By: Sanjay Pokhriyal