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IIT से पद्म भूषण तक... नंदन नीलेकणि का सफर, अब परीक्षा सुधार टास्क फोर्स की कमान

Published: Sun, 26 Jul 2026 07:49 PM (IST)Updated: Sun, 26 Jul 2026 08:52 PM (IST)

सरकार ने NEET पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए नंदन नीलेकणि ...और पढ़ें

नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी हाई पावर टास्क फोर्स

नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी हाई पावर टास्क फोर्स

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर सुधार करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

पीएम मोदी ने रविवार शाम करीब 7 बजे अपने X हैंडल पर वीडियो संदेश साझा करते हुए छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए अहम घोषणाएं कीं।

पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार लगातार कठोर कदम उठा रही है।

उन्होंने बताया कि इस तरह की गड़बड़ियों में शामिल लोग आज जेलों में सड़ रहे हैं, मामलों के त्वरित निपटारे कि लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं और सरकार संसद में और अधिक कठोर सजा के प्रावधान वाला कानून लाने जा रही है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह भरोसेमंद बनाने केलिए इसमें अत्याधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।

नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में टास्क-फोर्स गठित

देश की परीक्षा प्रणाली को फुलप्रूफ और पारदर्शी बनाने के इसी उद्देश्य से सरकार ने दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक और भारत की डिजिटल पहचान योजना के मुख्य सूत्रधार नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया है। यह टास्क फोर्स देश में पारदर्शी, डिजिटल और तकनीकी रूप से सुरक्षित परीक्षा ढांचा तैयार करने पर काम करेगी, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

कौन है नंदन नीलेकणि?

नंदन नीलेकणि भारत के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी उद्यमियों, विचारकों और नीति-निर्माताओं में से एक हैं, जिन्होंने देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी है। उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में एक कोंकणी परिवार में हुआ था।

उनकी शुरुआती शिक्षा बेंगलुरु और धारवाड़ में हुई, जिसके बाद उन्होंने देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की।

साल 1981 में उन्होंने एन.आर. नारायण मूर्ति और अपने 5 अन्य सहयोगियो के साथ मिलकर इन्फोसिस की नींव रखी थी। वे 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के सीईओ रहे, जिस दौरान कंपनी ने वैश्विक स्तर पर नया मुकाम भी हासिल किया।

बाद में उन्होंने कंपनी को छोड़ दिया। लेकिन गस्त 2017 में कंपनी के भीतर मचे आंतरिक विवाद के बाद उन्हें गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में वापस बुलाया गया।

UIDAI के पहले अध्यक्ष रहे

वहीं नंदन नीलेकणि ने देश के डिजिटल स्वरूप को बदलने में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। साल 2009 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने उन्होंने कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया था।

नीलेकणि को भारत की बायोमेट्रिक पहचान परियोजना को सफलतापूर्वक डिजाइन और लागू करने का श्रेय जाता है, जो आज देश के डिजिटल तंत्र का मुख्य आधार मानी जाती है।

डिजिटल भुगतान समिति के भी अध्यक्ष रहे

इसके अलावा 2016 में उन्होंने भारत सरकार की उस उच्चस्तरीय समिति का भी नेतृत्व किया था, जिससे देश में यूपीआई जैसे डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा मिला।

इसके अलावा उनके राजनीतिक जीवन की बात करें तो नंदन नीलेकणि ने साल 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण सीट से चुनाव लड़ था, हालांकि उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद से वे सक्रिय राजनीति से दूर रहे।

आईटी और सार्वजनिक सेवा में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हे 2006 में देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा था।