जौहर अम्बुज माहेश्वरी, रायसेन।  मध्य प्रदेश के रायसेन किले से जुड़े संघर्ष में 701 राजपूतानियों के जौहर को आज 488 साल पूरे हो गए हैं। मुगलों के आक्रमण के दौर में जौहर की इस कहानी के बारे में कम लोग ही जानते हैं।

छह मई 1532 को रानी दुर्गावती ने 700 राजपूतानियों के साथ जौहर किया था

बात 6 मई 1532 की है जब रायसेन किले पर राजा शिलादित्य की रानी दुर्गावती ने बहादुर शाह के सामने झुकने की बजाय लड़ने की बात कही थी। दुर्गावती ने मुगलों के सामने घुटने टेकने की जगह 700 राजपूतानियों के साथ जौहर कर लिया था।

रानी दुर्गावती और 700 राजपूतानियों के जौहर के आज 488 साल पूरे

आज रानी दुर्गावती और 700 राजपूतानियों के जौहर को 488 साल पूरे हो चुके हैं। रानी दुर्गावती मेवाड़ के महाराजा राणा सांगा की बेटी थीं, उनका विवाह रायसेन के तोमर राजा शिलादित्य से हुआ था।

धोखा देकर किया था राजा शिलादित्य को कैद

6 मई 1532 को किले में हुए इस जौहर के कई प्रमाण इतिहास में मिलते हैं। रायसेन के गजेटियर में भी इस घटना का उल्लेख है। दरअसल गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने रायसेन के राजा सिल्हादी शिलादित्य को अपने कैंप में बुलाकर धोखे से मांडू में कैद कर लिया था। रायसेन किला जब रानी दुर्गावती और शिलादित्य के भाई लक्ष्मण राय की देखरेख में था तो इसे घेर लिया। घेराबंदी के बाद भी सुल्तान जब किले में सेंध नहीं मार पाया तब शिलादित्य ने बहादुर शाह से अपने भाई व पत्नी से बात करने की इच्छा जताई। शिलादित्य ने किले में पहुंचकर रानी दुर्गावती और भाई से मंत्रणा की। इसमें न झुकने और हर हाल में लड़ने का फैसला लिया गया।

हार तय थी पर किया युद्ध, रानी दुर्गावती ने 700 राजपूतनियों के साथ जौहर करने का निर्णय लिया

किले में बारूद की कमी और शत्रु सेना की अधिक संख्या के चलते हार तय थी, इसलिए रानी दुर्गावती ने 700 राजपूतनियों के साथ जौहर करने का निर्णय ले लिया। राजपूतों ने लड़ाई जारी रख आत्मघाती युद्घ तो किया, लेकिन शिलादित्य और उसके भाई मारे गए। शिलादित्य का बेटा भूपति राय इस समय एक युद्घ अभियान पर था, जब उसे इस घटना की जानकारी मिली तो वह लौटा और बहादुर शाह के सामंत को मार भगाया। इस तरह रायसेन किले पर फिर राजपूतों का कब्जा हो गया।

जौहर के हैं कई प्रमाण

रायसेन के ऐतिहासिक किले में दुर्गावती के जौहर के कई प्रमाण मिले हैं। गजेटियर में भी इसका उल्लेख है। इतिहास को अगर देखा जाए तो मध्यकाल में रायसेन किले की महत्वपूर्ण भूमिका रही है-नारायण व्यास, वरिष्ठ पुरातत्वविद, मध्य प्रदेश।

Posted By: Bhupendra Singh

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