UN में पाकिस्तान की कब-कब हुई फजीहत? नापाक मुल्क के हर झूठ को भारत करता रहा बेनकाब
वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की फजीहत कोई नई बात नहीं है। हालांकि समझने वाली बात यह है कि जब-जब पाकिस्तान ...और पढ़ें

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने हमेशा से पाकिस्तान को लतारा है।
HighLights
पाकिस्तान ने यूएन में कश्मीर और आतंकवाद पर झूठे दावे किए।
भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद को पनाह देने का पर्दाफाश किया।
पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और पाखंड को भारत ने हमेशा दुनिया को बताया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आतंकवाद का पनाहगाह पाकिस्तान वैश्विक मंच पर अपनी किरकिरी कराने से कभी ना बाज आया है और ना आएगा। हालांकि इस बात में भी कोई दोराय नहीं है कि आतंकवाद की भट्ठियों में सुलग रहे नापाक पड़ोसी ने जब भी भारत के खिलाफ जहर उगलने या झूठे प्रोपेगेंडा का सहारा लेने की कोशिश की है, भारत ने उसे पूरे तरह से बेनकाब कर दिया है।
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के गलियारों से लेकर सुरक्षा परिषद तक, जब-जब पाकिस्तान ने अपने नापाक मंसूबों को कामयाब करने का प्रयास किया है, तब तब भारत ने जोरदार पलटवार करते हुए नापाक पड़ोसी को करारा जवाब दिया है।
शहबाज शरीफ के झूठ पर भारत का प्रहार
अब ये यूएन, पाकिस्तान का जिक्र इसलिए भी चर्चा में हैं, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासभा UNGA के 81वें सत्र में शुक्रवार को पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने एक बार फिर अपनी हरकतों से अपनी फजीहत करवा ली।
पाकिस्तानी पीएम ने एक बार फिर अपना झूठा दावा पेश किया और कश्मीर का राग भी अलापा। शहबाज ने कहा कि मैं अपने कश्मीरी भाइयों और बहनों को पूरे अधिकार के साथ भरोसा दिलाता हूं कि हम उन्हें तब तक अपना पूरा राजनैतिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देते रहेंगे जब तक उन्हें आत्मनिर्णय का उनका अटूट अधिकार नहीं मिल जाता।
फिर क्या? भारत ने ऐसी दिखाई औकात
भारत की इस बेबाक बेटी ने दो टूक अंदाज में पाकिस्तानी पीएम के झूठे दावों पर कहा कि इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है क्योंकि इस हमले का मास्टरमाइंड, ओसामा बिन लादेन, पाकिस्तानी सेना की मुख्य अकादमी के ठीक पास रह रहा था। यही वह संस्था है जिसके सामने आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने इतना ज्यादा सिर झुका रखा है।
अब ये बात तो अभी की है, ऐसे में आपका ये जनना अहम है कि आखिर पाकिस्तान ने वैश्विक मंच पर कब-कब ऐसी हरकतें की है? और भारत ने कैसे पाकिस्तान को हमेशा बेनकाब कर सच्चाई का आईना दिखाया है? आइए इतिहास के पन्नों को पलटते हैं और जानते हैं....
कश्मीर के मुद्दे पर पुराना इतिहास, सच क्या?
सबसे पहले आपको ये बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर और सीमा पार आतंकवाद को लेकर एक लंबा इतिहास रहा है। साल 1948 से लेकर अब तक, पाकिस्तान ने अनगिनत बार UN में कश्मीर राग अलापा है।
हालांकि भारत ने हर बार उसके अवैध कब्जों और आतंकवाद समर्थक नीतियों की धज्जियां उड़ाई हैं। पिछले कुछ समय में संयुक्त राष्ट्र के अलग-अलग मंचों पर भारत ने पाकिस्तान को जिस तरह धोया है, वो उसके नापाक मंसूबों को साफ-साफ बयां करती हैं।
जब पहली बार 1948 में UN की देहरी पर उठा था कश्मीर का मुद्दा
इस बात को ऐसे समझिए कि कश्मीर के मामले को सबसे पहले जनवरी 1948 में भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सामने उठाया गया था। तब से लेकर आज तक यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक अहम हिस्सा बना हुआ है।
अहम बात यह है कि भारत शुरू से ही इस बात पर अडिग रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसके कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। भारत का यह भी मानना है कि आंतरिक और द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष या अंतरराष्ट्रीयकरण की कोई आवश्यकता नहीं है।
इसके विपरीत, पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों का हवाला देकर लगातार यह राग अलापता रहा है कि कश्मीरियों को आत्मनिर्णय का अधिकार मिलना चाहिए। वह इस मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ झूठा नैरेटिव सेट करने के लिए करता आया है।
पानी की बूंद को तरस रहे पाकिस्तान की बौखलाहट और भारत का जवाब
अब समय था जुलाई 2025 का....जब पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता का फायदा उठाकर कश्मीर और सिंधु जल संधि पर अनाप-शनाप टिप्पणियां कीं।इस पर भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर और सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की टिप्पणियों का कड़ा खंडन किया था।
पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाते हुए भारत ने दो टूक कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। इस पर किसी तीसरे देश या मंच के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है।
पाखंडी और दिवालिया पाकिस्तान का पूरा सच
इस बात में भी कोई दोराय नहीं है कि भारत ने दुनिया के सामने बार-बार उजागर किया है कि जो देश कट्टरता में डूबा हो, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज पर जिंदा हो और आतंकवादियों तथा नागरिकों में फर्क न कर सके उसे मानवाधिकारों या शांति पर ज्ञान देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
भारत हमेशा से ही मुखर आवाज में दुनिया को यह बताते आया है कि कैसे भारत हमेशा से सीमा पर पाकिस्तानी आतंकवादियों के हमले को झेलता आया है। चाहे वो 26/11 मुंबई हमला हो, 2001 संसद भवन पर अटैक की योजना हो या फिर पहलगाम आतंकी हमला।
फरवरी 2025- आतंकवाद के गढ़ पर सीधा प्रहार
पिछले साल शुरुआत में ही यूएनएससी (UNSC) की बैठक में भारत ने पाकिस्तान को दुनिया का 'आतंकवाद का वैश्विक केंद्र' बताया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की जमीन पर जैश-ए-मोहम्मद जैसे खतरनाक आतंकी संगठन फल-फूल रहे हैं।
यूएन द्वारा प्रतिबंधित 20 से ज्यादा आतंकी आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं और इसके बावजूद पाकिस्तान खुद को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाला देश बताता है, जो कि सबसे बड़ी विडंबना है।
मई 2025- पाखंडी चेहरे का पर्दाफाश
मई के महीने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान के रवैये को 'बेहद पाखंडी' करार दिया। भारत ने दुनिया को बताया कि पाकिस्तानी सेना नागरिकों और आतंकवादियों के बीच कोई फर्क नहीं समझती।
'ऑपरेशन सिंदूर' में मारे गए आतंकियों को पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों द्वारा श्रद्धांजलि देना इस बात का पक्का सबूत था कि पाकिस्तान आतंकवाद को कैसे पालता है। इसके साथ ही भारतीय गांवों में जानबूझकर गोलाबारी कर बेकसूर नागरिकों को निशाना बनाने के लिए भी पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया गया।
जून 2025- बाल अधिकारों के नाम पर एजेंडा फेल
बच्चों और सशस्त्र संघर्ष से जुड़ी यूएनएससी की खुली बहस में पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ झूठा एजेंडा चलाने की कोशिश की। भारत ने तुरंत उसके इस नापाक मंसूबे को पानी फेरते हुए खारिज कर दिया।
भारत ने दो टूक अंदाज में साफ-साफ कहा कि जो देश खुद बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करता है और पहलगाम हमले के आतंकियों को राजकीय सम्मान देता है, उसे भारत पर उंगली उठाने का कोई हक नहीं है।
जुलाई 2025- 80वीं वर्षगांठ और आईएमएफ के कर्ज का ताना
संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर पिछले साल जुलाई में भारत ने वैश्विक शांति और आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराई। भारत ने दुनिया को याद दिलाया कि कैसे शीत युद्ध के बाद आतंकवाद का रूप बदला है।
इसी मंच पर भारत ने अपनी मजबूत लोकतांत्रिक और तेजी से बढ़ती आर्थिक ताकत की तुलना उस पाकिस्तान से की, जो पूरी तरह कट्टरता में डूबा हुआ है और अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए बार-बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भीख मांगने पर मजबूर है।
कैसे होती है पाकिस्तान की किरकिरी?
इस बात को समझना शायद ज्यादा मुश्किल नहीं है। इसकी वजह है कि हमेशा से ही पाकिस्तान एक तो झूठे दावे करता है और फिर अंट-शंट बातें भी। ऐसे में यूएन में पाकिस्तान को चित करने के लिए भारत बेहद सधी हुई और आक्रामक कूटनीतिक रणनीतियों का इस्तेमाल करता है।
'राइट टू रिप्लाई'- जब भी पाकिस्तानी प्रतिनिधि यूएन महासभा या सुरक्षा परिषद में कश्मीर या बेबुनियाद मुद्दों को उठाते हैं, भारत इस अधिकार का इस्तेमाल कर उनके झूठ के गुब्बारे की हवा निकाल देता है।
ठोस सबूतों की पेशी- भारत कोरे बयानों की जगह सीमा पार घुसपैठ, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के ठिकानों और आतंकी गतिविधियों के पुख्ता सबूत दुनिया के सामने रखता है।
आंतरिक बदहाली का आईना- भारत वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और आंतरिक संघर्षों का जिक्र कर उसकी दोहरी नीति को उजागर करता है।
पाकिस्तान को कौन समझाए- झूठ के पैरों में पहिए नहीं होते...
कुल मिलाकर एक बात तो साफ है कि पाकिस्तान चाहे जितने भी झूठे दावे कर ले, दुनिया अब उसकी फितरत को अच्छी तरह समझ चुकी है। पहलगाम के मासूम पर्यटकों के खून के छींटे और आतंकवाद को पालने-पोसने के उसके काले कारनामे आज किसी से छिपे नहीं हैं। जब-जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री या उसके नुमाइंदे यूएन के मंच से झूठ का सहारा लेते हैं, भारत के कूटनीतिक प्रहार उनकी हर चाल को धराशायी कर देते हैं।
आतंक के साए में जी रहा पाकिस्तान जब तक अपनी हरकतों से बाज नहीं आता, तब तक हर वैश्विक मंच पर उसकी ऐसी ही किरकिरी होना तय है। सत्य और लोकतांत्रिक मजबूती के साथ खड़ा भारत दुनिया के सामने पाकिस्तान के पाखंड का पर्दाफाश करने के लिए हर बार पूरी तरह तैयार मिलता है और फिर पाकिस्तान इसी तरह से अपनी फजीहत करता रहता है।
