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नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से पूछा है कि अन्य देशों में सजा ए मौत देने के क्या तरीके अपनाए जाते हैं। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि वह भारत में मृत्युदंड पाए अपराधी को मृत्युदंड देने का क्या तरीका होना चाहिए यह तय नहीं कर रहा है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को यह बात वकील ऋषि मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मृत्युदंड देने का फांसी के अलावा कोई दूसरा तरीका अपनाये जाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि फांसी बहुत क्रूर तरीका है। इस याचिका पर कोर्ट ने गत 6 अक्टूबर को सरकार को नोटिस जारी किया था और जवाब मांगा था। लेकिन सरकार ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कोर्ट से मामले में जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और समय मांगा। कोर्ट ने उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

गत 6 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले पर नोटिस जारी करते हुए टिप्पणी की थी कि हमारा संविधान करुणा और चैतन्य दस्तावेज है। विधायिका कानून बनाने पर विचार कर सकती है ताकि मृत्युदंड पाने वाला शांति से मरे न कि दर्द में। मल्होत्रा ने याचिका में मरने तक फांसी पर लटकाए रखने (हैंग टिल डेथ) का प्रावधान करने वाली सीआरपीसी की धारा 354(5) को रद करने की मांग की है।

याचिका में विधि आयोग की 187वीं रिपोर्ट को आधार बनाया है। विधि आयोग की यह रिपोर्ट मृत्युदंड के तरीकों पर है। इस रिपोर्ट में भी आयोग ने फांसी के साथ इंजेक्शन के जरिये मौत दिये जाने के वैकल्पिक तरीके को भी अपनाए जाने की सिफारिश की थी और इसके लिए सीआरपीसी की धारा 354(5) में जरुरी संशोधन की संस्तुति की थी। आयोग की यह रिपोर्ट अक्टूबर 2003 की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अमरीका में 35 राज्यों में मृत्युदंड में फांसी खत्म कर उसकी जगह गोली मारने या इलेक्टि्रक चेयर के तरीके को अपनाया गया है।

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Posted By: Manish Negi

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