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भारत में वोटर होने के लिए क्या है पहली शर्त, फॉर्म 6 के साथ घोषणापत्र क्यों जरूरी? पूरी डिटेल

Published: Thu, 24 Sep 2026 10:40 PM (IST)

चुनाव आयोग का फॉर्म 6 भारतीय नागरिकता और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चर्चा में है।

फॉर्म 6 में भारतीय नागरिकता पुष्टि हेतु घोषणापत्र जोड़ा गया (फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया)

फॉर्म 6 में भारतीय नागरिकता पुष्टि हेतु घोषणापत्र जोड़ा गया (फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चुनाव आयोग का फार्म 6 चर्चा में है जिसके जरिए नए वोटर जोड़े जाते हैं। सियासत गर्म है और सवाल खड़ा करने वाले चुनाव आयोग के ही दो आयुक्त चुप्पी साधे बैठे हैं। हालांकि दोनों आयुक्तों ने भी संशोधन पर सवाल नहीं खड़ा किया बल्कि प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया था।

फिर भी विपक्षी दल नए सिरे से मुख्य चुनाव आयुक्त और सरकार की घेरेबंदी में जुटे हैं। लेकिन इस पूरे विवाद के बीच एसआइआर और मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़े संविधान की भावना और सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े बयान को नजरअंदाज किया जा रहा है।

वोटर होने की सबसे जरुरी शर्त क्या है?

संविधान कहता है कि केवल भारतीय नागरिक ही वोटर हो सकते हैं और कुछ महीने पहले ही एसआइआर पर एक निर्णय की शुरूआती लाइन में ही मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, 'किसी भी सरकार को वोटों की गिनती गिनने से पहले यह जानना चाहिए कि किसके वोट गिने जा सकते हैं।' स्पष्ट संदेश था कि वोटर हर मानक पर सही वोटर होना चाहिए।

गौरतलब है कि कई बिंदुओं पर असहमति जताने वाले दोनों आयुक्त एस एस संधु और विवेक जोशी ने लिखित रूप में कहा था कि फार्म 6 में केंद्रीय कानून मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन के बगैर संशोधन नहीं किए जा सकते हैं। हालांकि बताया जाता है कि यह असहमति तब तत्काल नहीं बाद में आई थी। और बाद में हर पक्ष पर लंबी सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी पक्ष में फैसला दिया था।

सर्वसम्मति से हुए SIR के फैसले

आयोग के सूत्रों के अनुसार एसआईआर समेत अधिकतर फैसले सर्वसम्मति से हुए थे। वैसे भी नियम कहता है कि सर्वसम्मति से फैसले की कोशिश होनी चाहिए। वरना बहुमत से फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार कुछ असहमतियां तो तब आई जब तीनों आयुक्तों ने पहले ही सर्वसम्मति से फैसला ले लिया था।

एक दिन पहले ही चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट कर दिया कि उक्त फार्म में कोई संशोधन किया भी नहीं गया है। केवल साथ में एक घोषणापत्र अलग से जोड़ा गया है जिसमें पिता, दादा आदि के बारे में जानकारी मांगी गई है। वस्तुत: यह संविधान की उस मंशा और सुप्रीम कोर्ट के वक्तव्य की दिशा मे है जिसके तहत वोटर होने के लिए भारतीय नागरिकता जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने भी एक तरफ जहां चुनाव आयोग के पास एसआईआर कराने के अधिकार की बात कही थी वहीं शुद्धता की इच्छा भी जताई थी। आयोग के सूत्रों के अनुसार नए वोटर बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं। जिस किसी को प्रक्रिया में परेशानी हो रही है उसका समाधान भी किया जा रहा है।

लेकिन सामान्यतया 20 साल के अंतराल मे होने वाले एसआइआर में संशोधन के ऐसे मानक डालने ही होंगे कि धीरे धीरे सौ प्रतिशत शुद्धता के लक्ष्य का हासिल किया जा सके। आयुक्तों में कुछ मुद्दों पर अपनी शुरूआती असहमति जरूर जताई थी लेकिन अंतिम फैसला हमेशा बहुमत के ही आधार पर हुआ है और यही लोकतांत्रिक पद्धति है।

मतदाता सूची में घुसपैठ 

आयोग के सूत्रों के अनुसार मतदाता सूची में घुसपैठ दो तरह के हैं: पहला जो भारतीय नागरिकता के बगैर मतदाता सूची में शामिल होकर हमारे लोकतंत्र को प्रभावित कर रहे हैं या करना चाहते हैं। और दूसरा जिनका नाम कई स्थानों पर है या फिर वह मौजूद नहीं हैं लेकिन उनके वोट का फायदा उठाया जाता है।

एक सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार पहली तरह के घुसपैठ से निपटने के लिए जरूरी है हर जरूरी स्तर पर कुछ मानक स्तर होने चाहिए। फार्म 6 के साथ जोड़ा गया घोषणापत्र भी ऐसा ही एक स्तर है। यह गैरकानूनी नहीं है।

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