होर्मुज बंद रहा तो 120 डॉलर तक जा सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें, भारत की अर्थव्यवस्था पर गहराएगा संकट
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे ...और पढ़ें

कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर तक जाने की संभावना (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)
HighLights
पश्चिम एशिया तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने 120 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया।
भारत की महंगाई और चालू खाता घाटा प्रभावित होगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है और चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही तक कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सामान्य स्थिति में दूसरी छमाही में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 95 डॉलर से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में इस बात का भी अनुमान लगाया गया है कि इस इलाके में दिक्कतें आगे भी बनी रहेंगी जबकि पाइपलाइन और शिपिंग संचालन में स्थिति थोड़ी सुधर सकती है।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण ने कहा, ब्रेंट फ्यूचर्स एक महीने में लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर 15 सितंबर को लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि फिजिकल ब्रेंट 130.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जो कम सप्लाई का संकेत है। फिजिकल ब्रेंट उस वास्तविक भौतिक कच्चे तेल और उसके हाजिर या फारवर्ड बाजार को कहते हैं, जिसका उत्तरी सागर से उत्पादन और वास्तविक लेनदेन होता है।
उनके मुताबिक-अगले एक से दो महीनों में ब्रेंट के 100-110 डॉलर प्रति बैरल की सीमा में ट्रेड करने की उम्मीद है। हालांकि, अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतों में तेजी आ सकती है। शरण कहते हैं, अगर आपूर्ति में रुकावट बढ़ती है, तो कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल तक कम हो सकती हैं।
रिपोर्ट में सामान्य स्थिति में यह भी अनुमान लगाया गया है कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94-98 रुपये, खुदरा महंगाई पांच से साढ़े पांच प्रतिशत और चालू वित्त वर्ष में रियल जीडीपी वृद्धि 6.6 से सात प्रतिशत रहेगी।
इसके अलावा, रिपोर्ट में भी अनुमान लगाया गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार 10 डॉलर की वृद्धि से भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 0.3-0.4 प्रतिशत बढ़ सकता है और एक साल में महंगाई 20 से 30 आधार अंक तक बढ़ सकती है। (समाचार एजेंसी PTI के इनपुट के साथ)
