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पश्चिम एशिया संकट का बजट पर असर, सरकार को 1.35 लाख करोड़ का नुकसान: ICRA

Published: Tue, 27 Oct 2026 10:41 PM (IST)

पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत सरकार को लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

पश्चिम एशिया संकट से सरकार को अब तक 1.35 लाख करोड़ का नुकसान। (एएनआई)

पश्चिम एशिया संकट से सरकार को अब तक 1.35 लाख करोड़ का नुकसान। (एएनआई)

HighLights

  1. पश्चिम एशिया संकट से 1.35 लाख करोड़ का नुकसान।

  2. ICRA ने सरकारी बजट पर असर बताया।

  3. नियमित खर्चों में बचत से दबाव कम होगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट से अब तक सरकार को लगभग 1.35 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। हालांकि, नियमित खर्चों में बचत करके सरकार इस दबाव को झेल सकती है।

रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि उर्वरक और एलपीजी सब्सिडी के लिए अधिक आवंटन और साथ ही उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती से बजट अनुमान से कम वसूली होने से सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ सकता है।

प्रत्यक्ष करों और तेल कंपनियों से मिलने वाले लाभांश का भी कुछ असर पड़ सकता है। हालांकि, सोने-चांदी के आयात पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) से उम्मीद से अधिक कमाई होने और सरकारी खर्चों में बचत होने से इस दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में सरकार का वास्तविक खर्च बजट अनुमानों से कम रहा है, जिससे अतिरिक्त खर्चों को संभालने की गुंजाइश बनी रहती है। इसलिए उम्मीद है कि इस संकट से निपटने के लिए इस साल खर्चों में कोई अनावश्यक कटौती करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

हालांकि, नायर ने चेतावनी दी कि यह अनुमान मौजूदा स्थिति पर आधारित है। अगर पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक चलता है या इसका आर्थिक असर और बढ़ता है, तो यह अनुमान बदल सकता है। सरकार के आधिकारिक बजट दस्तावेजों के अनुसार, 2026-27 के केंद्रीय बजट में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार ने 2026-27 के लिए अपने कर्ज-से-जीडीपी अनुपात का अनुमान 55.6 प्रतिशत लगाया है। उन्होंने कहा कि छोटी बचत योजनाओं में जमा राशि पिछले साल की तुलना में अधिक रही है और इसके बजट अनुमान से भी ज्यादा रहने की उम्मीद है। इससे सरकारी खजाने को एक और सहारा मिल सकता है।

उन्होंने कहा, अगर राजकोषीय घाटे में 20-30 आधार अंक की मामूली बढ़ोतरी भी होती है, तो हमें नहीं लगता कि दूसरी छमाही के लिए उधार लेने के लक्ष्य में बदलाव करने की जरूरत है।

(समाचार एजेंसी एएनआई इनपुट के साथ)