नई दिल्ली, जेएनएन। कुदरत की मार से न उत्तर भारत बचा है न ही दक्षिण भारत। आसमान से आफत बसर रही, नीचे लोग त्राहीमाम-त्राहीमाम कर रहे हैं। बाढ़ से आधे हिंदुस्तान में कोहराम मचा हुआ है। उत्तराखंड, गुजरात, बिहार, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, ओडिशा में आये जलप्रलय से अबतक 200 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 12 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं। यहीं नहीं मौसम विभाग ने पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी अलर्ट जारी किया है।

केरल
केरल के 14 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें से छह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मलप्पुरम जिले में स्थित कवलप्पारा और पुथुमाला गांव और वायनाड जिला सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। यहां अबतक 40 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के एक मुताबिक दक्षिण केरल में अगले दो दिनों में भारी बारिश होने की संभावना है।

कर्नाटक
यहां बाढ़ की चपेट में आने से अबतक 48 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 12 लोग लापता हैं।

महाराष्ट्र
यहां मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 हो गई। जबकि लगभग 4.48 लाख लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकाला जा चुका है, जिसमें कोल्हापुर और सांगली से 4.04 लाख लोग शामिल हैं। सभी को राहत शिविरों में सुरक्षित भेज दिया गया है।

गुजरात
गुजरात में पिछले पांच दिनों में बारिश से संबंधित घटनाओं में लगभग 31 लोग मारे गए हैं। कच्छ जिले में बाढ़ में फंसे लगभग 125 लोगों को भारतीय वायु सेना द्वारा बचाया गया।

उत्तराखंड
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के चमोली जिले के तीन अलग-अलग गांवों में भूस्खलन में एक महिला और उसकी नौ महीने की बेटी सहित छह लोग जिंदा दफन हो गए। बाढ़ से घिरे चुफलागड़ नदी के पानी के बहाव में दो इमारतें बह गईं।

दिल्ली-एनसीआर में हो रही बारिश
पिछले कई दिनों से गर्मी व उमस से परेशान हो रहे लोगों को मंगलवार दोपहर उस समय राहत मिली, जब कुछ इलाकों बदरा मेहरबान हुए और झमाझम बारिश हुई। मौसम विभाग के मुताबिक, बारिश का यह दोर रविवार तक चलेगा। अगले छह दिन लगातार बारिश की संभावना है। दिल्ली के ज्यादातर हिस्सों में यह बारिश बनी रहेगी। दूसरी तरफ स्काईमेट वेदर ने भी 13 से 18 अगस्त के बीच राजधानी में अच्छी बारिश होने की संभावना जताई है।

ओडिशा
राजधानी भुवनेश्वर समेत पूरे राज्य में हो रही लगातार बारिश से एक तरफ जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है तो वहीं दूसरी तरफ एक बार मालकानगिरी जिले में बाढ़ की स्थिति ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। जिले से होकर गुजरने वाली कुछ नदियों का जलस्तर बढ़ जाने से निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कंधमाल और गंजम जिले में भी भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर आ गई हैं और सैकड़ों लोग पानी के घेरे में आ गए हैं।

अन्य राज्यों में बाढ़ का खतरा
बाढ़ को लेकर मध्य प्रदेश के 28 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। राजस्थान में भी कुदरत का कहर बरपा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में भारी बारिश के बाद बाढ़ का कहर है। कई इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। गोवा के भी कई इलाकों में भारी बारिश के बाद बाढ़ के हालात हैं।

होता है भारी नुकसान
भारत में लगभग 15 फीसद बाढ़ का खतरा रहता है। इससे हर साल औसतन 2,000 लोग मारे जाते हैं और 80 लाख हेक्टेयर भूमि प्रभावित होती है, जिससे हमें लगभग 1,800 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।

साल दर साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या
साल, मरने वालों की संख्या

  • 2016-17, 1550
  • 2017-18, 2494
  • 2018-19, 2045

कौन जिम्मेदार प्रकृति या हम?
ज्यादा बारिश ही नहीं हमारी योजनाओं में कमी भी बाढ़ का प्रमुख कारण है। बाढ़ से बचाव के लिए बुनियादी ढांचे बनाने की तुलना में हम बाढ़ से प्रभावित लोगों पर अधिक खर्च करते हैं। नेशनल कमीशन ऑफ फ्लड के मुताबिक जिन क्षेत्रों को बाढ़ से खतरा रहता है उन्हें सही समय पर सुरक्षा प्रदान की जा सकती है ताकि जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम किया जा सके।

2017 में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक देश में बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने के लिए 1997 से 2016 के बीच लगाए गए 375 टेलीमेट्री स्टेशनों में से 60 फीसद स्टेशन काम नहीं कर रहे हैं। बांध भी बाढ़ का एक प्रमुख कारण है। इस साल बांधों ने ही महाराष्ट्र में आई बाढ़ में अहम भूमिका निभाई है। पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होने वाला अवैध खनन भूस्खलन लाता है। जबकि नदी-किनारे रेत खनन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का विस्तार करता है।

बाढ़-बारिश में घर ढह (लाखों में)
साल, घर ढह

  • 2016-17, 5.5
  • 2017-18, 11.9
  • 2018-19, 15.6

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Posted By: Nitin Arora