पहाड़ से मैदान तक भारी बारिश का कहर: हिमाचल में पांच की मौत, कश्मीर में फटा बादल; चारधाम यात्रा स्थगित
सोमवार देर रात मूसलधार वर्षा के बीच पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाहड़ में एक कार फिसलकर गहरी खाई में जा ...और पढ़ें
HighLights
कश्मीर में बादल फटा, निचले इलाकों में अचानक आई बाढ़
हिमाचल में चंबा में भूस्खलन से 10 वाहन मलबे में दबे
जागरण टीम, नई दिल्ली। पहाड़ से मैदान तक मूसलधार वर्षा के दौरान कई जगह भारी नुकसान हुआ। हिमाचल में बारिश के चलते सड़क हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। उत्तरी कश्मीर में बांडीपोरा जिले में मंगलवार को बादल फटने से निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई।
कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। उत्तर प्रदेश में भी तीन लोगों की जान गई। यहां बुलंदशहर में प्रशासन की लापरवाही के चलते कक्षा चार की एक बच्ची स्कूल से लौटते वक्त खुले नाले में जा गिरी।
सोमवार देर रात मूसलधार वर्षा के बीच पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाहड़ में एक कार फिसलकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में तीन माह के बच्चे समेत एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई।
कार सवार पीजीआई चंडीगढ़ से बच्चे के उपचार के बाद लौट रहे थे। चंबा में भूस्खलन से करीब 20 वाहन मलबे में दब गए। हिमाचल में 108 मुख्य व कई संपर्क सड़कें बंद हैं। कश्मीर में बाढ़ से रिहायशी मकानों, कृषि भूमि और स्थानीय बुनियादी ढांचे को खतरा पैदा हो गया है।
बुलंदशहर में स्कूल से घर लौट रही कक्षा चार की छात्रा खुले नाले में डूबी
बुलंदशहर नगर पालिका की अनदेखी की वजह से खुले पड़े शहर के नाले त्रासदी बन गए हैं। डेढ़ घंटे की बरसात के बाद मंगलवार को पूरा शहर जलमग्न हो गया। स्कूल से छुट्टी के बाद पैदल घर आ रही कक्षा चार की छात्रा चारू सड़क और नाले में भेद नहीं कर पाई और खुले नाले में जा गिरी।
देर शाम तक बच्ची का कुछ पता नहीं चल सका। डीएम कुमार हर्ष ने बताया कि मामले में प्रथम दृष्टया स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है।
बच्ची को अभिभावकों के साथ भेजना था या उन्हें बच्ची को घर छोड़कर आना चाहिए थे। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। उधर संभल में मकान की दीवार गिरने से ताई-भतीजी की मौत हो गई।
चारधाम यात्रा दो दिन के लिए स्थगित
उत्तराखंड में मूसलधार वर्षा के कारण चारधाम यात्रा दो दिन के लिए स्थगित कर दी गई है। यात्रियों को पड़ावों पर ही रोका गया है। गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंदस्वरूप ने बताया, गुरुवार को मौसम को देखते हुए यात्रा फिर शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
हिमाचल के कई क्षेत्रों में सोमवार रात जारी वर्षा ने मंगलवार को भारी नुकसान पहुंचाया है। चंबा जिले की द्रमण पंचायत के ओबड़ी मोहल्ले में प्रताप राणा के मकान पर गिरी चट्टानें व मलबा। इससे घर को काफी नुकसान पहुंचा है। चंबा शहर में ही करीब सौ घरों में मलबा घुसा है।
कई जगह लोगों ने सोमवार रात को भागकर जान बचाई। देहरादून में मंगलवार को प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड की मिट्टी बह जाने से एक हिस्सा धंस गया।
राजस्थान समेत कई राज्यों में भारी बारिश
पंजाब, उत्तराखंड, ओडिशा, हिमाचल, झारखंड व पूर्वी मध्य प्रदेश में मंगलवार दोपहर तक पिछले 24 घंटों में भारी बारिश होती रही। गंगा के मैदानी इलाकों, बंगाल, हरियाण और राजस्थान में भी भारी बारिश दर्ज की गई है।
उधर 29 जुलाई से तीन अगस्त तक हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राज्स्थान में काफी ज्यादा से लेकर व्यापक बारिश होने की संभावना है।
इसके अलावा 31 अगस्त तक हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में भारी बारिश की संभावना है। जम्मू-कश्मीर के 10 जिलों में एक अगस्त तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
असम में बाढ़ से 7 और मौतें, 3.32 लाख लोग प्रभावित
असम में बाढ़ से सात और लोगों की मौत के बाद कुल मृतक संख्या मंगलवार को बढ़कर 75 हो गई। हालांकि बाढ़ा की भयावहता में कमी है लेकिन अभी भी करीब 3.32 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित है।
एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। उधर राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को तत्काल सरकारी सहायता मुहैया कराने के लिए नियमों में ढील दी गई है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बुलेटिन में बताया गया किराज्य के शिवसागर, चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप मेट्रोपालिटन के सात जिले अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। कुल 21 राजस्व सर्कल और 622 गांव प्रभावित हुए हैं।
राज्य में बाढ़ से प्रभावित जनसंख्या 3,32,639 है
राज्य में बाढ़ से प्रभावित जनसंख्या 3,32,639 है, जिसमें चराईदेव सबसे अधिक प्रभावित है। यहां 1,42,756 लोग प्रभावित हुए हैं। सोमवार को, छह जिलों में बाढ़ का प्रभाव था, जिसमें 4.45 लाख लोग प्रभावित हुए थे। प्रदेश में कुल 81 राहत शिविर संचालित हैं, जहां विस्थापित लोग शरण लिए हैं।
