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'देश को हर तरह से मजबूत बनाकर इतिहास का प्रतिशोध लेंगे', एनएसए अजित डोभाल ने युवाओं से की ये अपील

Published: Sun, 11 Jan 2026 02:00 AM (IST)

डोभाल ने देशभर से आए तीन हजार युवा प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा-आप भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म स्वतंत्र ...और पढ़ें

'देश को हर तरह से मजबूत बनाकर इतिहास का प्रतिशोध लेंगे', एनएसए अजित डोभाल

'देश को हर तरह से मजबूत बनाकर इतिहास का प्रतिशोध लेंगे', एनएसए अजित डोभाल

HighLights

  1. कहा-प्रतिशोध अच्छा शब्द तो नहीं है, लेकिन यह अपने आप में बड़ी शक्ति हो सकती है

  2. एनएसए ने ''विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद'' के उद्घाटन समारोह को किया संबोधित

पीटीआई, नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को कहा कि भारत को न केवल सीमाओं पर, बल्कि हर तरह से खुद को मजबूत करना होगा, ताकि हमलों और पराधीनता के दर्दनाक इतिहास का प्रतिशोध लिया जा सके।

''विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद'' के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डोभाल ने महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों और बलिदानों का उल्लेख किया।

खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक ने देशभर से आए तीन हजार युवा प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा-आप भाग्यशाली हैं कि आपका जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ। मेरा जन्म गुलाम भारत में हुआ था। हमारे पूर्वजों ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और अनगिनत कठिनाइयों का सामना किया। भगत सिह जैसे लोगों को फांसी दी गई, सुभाष चंद्र बोस ने जीवनभर संघर्ष किया और महात्मा गांधी को हमारे लिए सत्याग्रह करना पड़ा, तब जाकर हमें स्वतंत्रता मिली।

एनएसए ने कहा कि प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं है, लेकिन यह अपने आप में बड़ी शक्ति हो सकती है। हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना है और देश को फिर उस मुकाम पर ले जाना है, जहां यह न केवल सीमा सुरक्षा के मामले में, बल्कि अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास..हर पहलू में फिर से महान बने।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को भविष्य का नेता बताते हुए डोभाल ने मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा-नेपोलियन ने एक बार कहा था कि मैं एक भेड़ के नेतृत्व में 1000 शेरों से नहीं डरता, लेकिन एक शेर के नेतृत्व में 1000 भेड़ों से डरता हूं। नेतृत्व इतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि हम एक प्रगतिशील समाज थे। हमने अन्य सभ्यताओं या उनके मंदिरों पर हमला नहीं किया, लेकिन सुरक्षा के मामले में हम जागरूक नहीं थे। इसलिए इतिहास ने हमें सबक सिखाया।

आगे कहा कि क्या हमने वह सबक सीखा? यह महत्वपूर्ण है कि हम उस सबक को याद रखें, क्योंकि अगर युवा इसे भूल जाते हैं, तो यह देश के लिए दुखद होगा। दुनिया में हर संघर्ष सुरक्षा संबंधी चिंताओं से ही जन्म लेता है।

उन्होंने कहा कि संघर्ष क्यों होता है? ऐसा नहीं है कि लोग मनोरोगी हैं और लाशें देखकर आनंद लेते हैं। बल्कि, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप अपनी सुरक्षा के लिए दुश्मन देश को अपने अधीन करना चाहते हैं और उसे अपनी शर्तें मानने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।

दुनिया में अभी जो भी संघर्ष चल रहा है, उसे देखिए। यह सुरक्षा के लिए दूसरे देश पर अपनी शर्तें थोपने के बारे में ही है। इसलिए हमें भी अपनी रक्षा करनी होगी। यह एक सशक्त भावना है। हमें इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।