खंडवा (नईदुनिया)। तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में नर्मदा जयंती (24 जनवरी) पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं को नर्मदा में पानी मिलेगा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध से पानी रोकने की तय प्रक्रिया की वजह से प्रमुख नागर घाट पर पानी कम और चट्टानें अधिक दिखाई देती हैं। वैसे अब यह आम बात हो चली है कि प्रमुख पर्वों पर भी नर्मदा जल विहीन नजर आ रही है। पिछले दस सालों से यही हाल है। श्रद्धालु पर्वों पर अकसर चट्टानों के बीच रुके पानी में स्नान करने को विवश हैं।

वसंत पंचमी (22 जनवरी) को ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित करने के लिए भूमिपूजन कार्यक्रम हुआ तो सरकार के नुमाइंदों के साथ ही देशभर के साधु-संत भी यहां पहुंचे। इस दौरान नर्मदा का जलस्तर सामान्य रहा, लेकिन आयोजन खत्म होते ही नर्मदा फिर चट्टानों के बीच खो गई।

दस साल पहले ओंकारेश्वर बांध से बिजली उत्पादन शुरू होने के साथ ही यहां नर्मदा का जलस्तर कम-ज्यादा होना शुरू हो गया था। इसका असर न केवल ओंकारेश्वर बल्कि नर्मदा किनारे के सनावद, बड़वाह और महेश्वर सहित अन्य जगहों पर पड़ा। अमावस्या, पूर्णिमा, शिवरात्रि जैसे पर्वों पर स्नान के लिए इन जगहों पर आने वाले श्रद्धालुओं को चट्टानों के बीच जमा पानी में डुबकी लगानी पड़ती है। ऐसे में कई लोग दुर्घटनाओं के भी शिकार हुए। आंकड़े बतात् हैं कि पिछले दस सालों में ओंकारेश्वर में 170 लोगों की मौत हो चुकी है।

मुख्यमंत्री की घोषणा भी बेकार

नर्मदा को सदा नीरा रखने के लिए बांध प्रबंधन (नर्मदा हाइड्रो इलेक्ट्रिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन कंपनी) के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। दो महीने पहले तो साधु-संतों और नगरवासियों ने धरना प्रदर्शन कर नगर बंद तक करवा दिया, लेकिन जिम्मेदारों पर कोई असर नहीं हुआ।

एक साल पहले मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने नर्मदा में जलस्तर सदा एक समान बनाए रखने की सार्वजनिक घोषणा की थी। एक माह पहले सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान ने आंदोलन कर रहे लोगों के बीच कसम खाकर जलस्तर एक समान रखने का वादा कर दिया, लेकिन बात है कि बन ही नहीं पा रही है।

नर्मदा हाइड्रो इलेक्ट्रिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से चर्चा हो चुकी है। नर्मदा में पर्याप्त पानी है और जयंती पर भी स्नान के लिए पर्याप्त पानी रहेगा।

-अरविंद चौहान, एसडीएम, पुनासा

(खंडवा)  

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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