नई दिल्ली, एएनआइ। भारत-चीन सीमा पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को वाटर प्रूफ ड्रेस की आवश्यकता महसूस हो रही है क्योंकि वहां गलवन नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। वहीं सीमा पर तैनात चीनी सेना वाटरप्रूफ ड्रेस पहन इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

सूत्रों के अनुसार, 'तापमान बढ़ने के साथ ही नदी में ठंडे पानी का बहाव तेज हो रहा है ऐसे में नदी किनारे तैनात सेना के जवानों को विशेष कपड़ों की आवश्यकता है।' गलवन नदी की घाटी के पास भारतीय पैट्रोलिंग प्वाइंट 14 के निकट चीन के शिविरों में सेना वाटर प्रूफ ड्रेस में है। उल्लेखनीय है कि इस ड्रेस के साथ वे ठंडे पानी में उतर सकते हैं। इससे पहले केएम-120 (KM-120) चौकी से पैट्रोलिंग प्वाइंट (PP-14) के बीच आने जाने में भारतीय सेना को नदी के ठंडे पानी से गुजरना होता था जिससे उनके जूते भीग जाते थे।

अक्साई चीन से निकलने वाली गलवन नदी वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control, LAC) से होकर गुजरती है और भारतीय पैट्रोलिंग प्वाइंट -14 ( PP-14) के पास श्योक नदी (Shyok river) में जाकर मिलती है।  काराकोरम की पहाड़ियों से सेम्जुंगलिंग नामक स्थान पर यह नदी निकलती है और पश्चिम में श्योक नदी में गिरती है। यह इलाका गलवान घाटी कहलाता है। श्योक नदी आगे सिंधु नदी में गिरती है। हालांकि चीन अब श्योक नदी पर दावा करने की कोशिश में जुटा है। बता दें कि भारत ने श्योक नदी के साथ-साथ डरबक से दोलत बेग ओल्डी तक 255  किमी लंबी सड़क का निर्माण किया है जिसपर चीन ऐतराज कर रहा है। 

लद्दाख सेक्टर से अरुणाचल प्रदेश तक फैले  LAC  में चीनी सेना बड़ी संख्या में तैनात है और बार-बार दोनों देशों के बीच वार्ता के बावजूद इसमें कोई कमी नहीं दिख रही है। 4 मई से ही चीन की ओर से  LAC के साथ-साथ फिंगर एरिया (Finger area), गलवन घाटी (Galwan valley) , डीबीओ सेक्टर (DBO sector) , पीपी-15 (PP-15), हॉट स्प्रिंग्स व घोघरा समेत अनेक इलाकों में गतिविधियां जारी हैं। 

Posted By: Monika Minal

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