जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हरे रंग के चांद तारे वाले झंडे पर रोक लगाने की मांग की है। रिजवी ने याचिका में कहा है कि ये झंडा इस्लाम का धार्मिक झंडा नहीं है। ये झंडा पाकिस्तान की राजनैतिक पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग से मिलता जुलता है। इस झंडे को फहराने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है। दाखिल याचिका में झंडे के बारे में इतिहास बताते हुए यहां तक कहा गया है कि पैगम्बर मोहम्मद साहब अपने कारवां में सफेद या काले रंग का झंडा प्रयोग करते थे।

याचिकाकर्ता का कहना है कि आधे चांद और तारे के निशान वाला यह हरा झंडा 1906 में आजादी से पहले पुरानी मुस्लिम लीग के वकार उल माली व मोहम्मद अली जिन्ना ने इजाद किया था। ये मुस्लिम लीग 15 अगस्त 1947 को खतम हो गई और उसके बाद पाकिस्तान में इसकी उत्तराधिकारी नयी मुस्लिम लीग पार्टी बनी जिसका नाम पाकिस्तान मुस्लिम लीग और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (कायदे आजम) है।

ये पार्टी पाकिस्तान में इस झंडे को अपने चिन्ह की तरह इस्तेमाल करती है जिसका भारत में मुसलमान इस्लामिक झंडे की तरह इस्तेमाल करते हैं। और इस झंडे को मुस्लिम बहुल इलाके में फहराया जाता है जिससे कई बार हिन्दू और मुसलमानों के बीच सौहर्द बिगड़ता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि हरे झंडे में आधा चांद और तारा कभी भी इस्लामिक प्रैक्टिस का हिस्सा नहीं रहा। और न ही इसकी इस्लाम धर्म में कोई महत्व है।
 

 

By Monika Minal