नई दिल्ली, प्रेट्र: पीएफआइ के खिलाफ देशभर में छापेमारी के बाद एनआइए ने गुरुवार को कहा कि इसके हिंसक कृत्यों से लोगों के मन में बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। एजेंसी ने एक बयान में कहा, पीएफआइ की गतिविधियों में प्रमुख लोगों और स्थानों को निशाना बनाने के लिए विस्फोटक को एकत्रित करना, इस्लामिक स्टेट को समर्थन और सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना शामिल है। लोग इनसे आतंकित होते हैं। गुरुवार को पीएफआइ के खिलाफ छापेमारी के दौरान कुछ स्थानों पर मुस्लिम युवाओं ने 'एनआइए वापस जाओ' के नारे लगाए। कुछ स्थानों पर उन्होंने छापेमारी में बाधा डालने का भी प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने हिरासत में लेकर उनके प्रयासों को विफल कर दिया। सीएए विरोधी आंदोलनों और 2020 में दिल्ली दंगा भड़काने के आरोपों लेकर ईडी पहले से पीएफआइ के आर्थिक संपर्कों की जांच कर रही है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां

गुरुवार की छापेमारी के दौरान एजेंसियों ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में सबसे ज्यादा 20-20 पीएफआइ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। तमिलनाडु में 10, असम में नौ, उत्तर प्रदेश में आठ, आंध्र प्रदेश में पांच, मध्य प्रदेश में चार, दिल्ली और पुडुचेरी में तीन-तीन तथा राजस्थान में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सभी गिरफ्तार कार्यकर्ताओं का विस्तृत विवरण फिलहाल उपलब्ध नहीं हो सका है।

पीएफआइ ने आज बुलाई हड़ताल

एनआइए और ईडी की छापेमारी के विरोध में पीएफआइ ने गुरुवार को केरल और तमिलनाडु में विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किया। संगठन ने शुक्रवार को केरल में हड़ताल बुलाई है। संगठन के राज्य महासचिव ने कहा कि आरएसएस नियंत्रित सरकार केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग कर असहमति की आवाज को दबाना चाहती है। हड़ताल को गैरजरूरी बताते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि राज्य सरकार को हड़ताल कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

मुस्लिम संगठनों ने कहा, युवा धैर्य बनाए रखें

कई मुस्लिम संगठनों ने समुदाय के युवाओं से अपील की है कि वे केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर धैर्य बनाए रखें। इन संगठनों ने कहा है कि उन्हें देश की न्यायिक प्रक्रिया, कानून और संविधान पर पूरा भरोसा है। आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज, मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन आफ इंडिया समेत अन्य संगठनों ने कहा है कि पीएफआइ और ऐसे अन्य 'सलाफी वहाबी' संगठन देश की सूफी बहुसंख्यक आबादी की मूल विचारधारा के खिलाफ मुस्लिम युवाओं को बरगलाना चाहते हैं। लेकिन, यह स्थिति इस्लाम, देश और मानवता के हित में नहीं है।

Edited By: Amit Singh