नई दिल्ली, प्रेट्र। अपने विस्तारित कार्यकाल के लिए प्रभार संभाल चुके रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव इसके पहले सीईओ हो सकते हैं। रेलवे में हाल ही में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) का पद सृजित किया गया है। पुनर्गठन कवायद के मद्देनजर यादव का एक साल का कार्यकाल विस्तार अहम है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में पुनर्गठन के लिए मंजूरी दी थी।

यादव को उनके पहले कार्यकाल में एक जनवरी 2019 को रेलवे बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उससे पहले उन्होंने दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक के रूप में काम किया था। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान न केवल काडरों के विलय की घोषणा की गई बल्कि बोर्ड को छोटा भी किया गया और लगभग 50 अधिकारियों को मुख्यालय से जोनल कार्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके अलावा, 'निजी परिचालकों' को कुछ ट्रेनें चलाने की अनुमति दी गई और रेलवे के सार्वजनिक उपक्रमों के निगमीकरण की घोषणा भी की गई।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग (इलेक्टि्रकल) में स्नातक यादव को यदि सीईओ नियुक्त किया जाता है तो उन पर काडर नियंत्रण की जिम्मेदारी होगी और डीजी (HR) उनकी सहायता करेंगे।

यादव रेलवे में कई महत्वपूर्ण कार्यकारी और प्रबंधकीय पदों पर काम कर चुके हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में, रेलवे के सर्वोच्च रैंकिंग वाले अधिकारी के रूप में यादव पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी होगी कि रेलवे का महत्वाकांक्षी काडर विलय बिना किसी अड़चन के लागू किया जाए। हालांकि, उनकी सबसे बड़ी चुनौती रेलवे को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना होगा क्योंकि पिछले कुछ वर्षो से रेलवे गंभीर नकदी संकट का सामना कर रहा है।

Posted By: Dhyanendra Singh

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