चमोली [देवेंद्र रावत]। उत्तराखंड के सीमांत चमोली जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में बारिश मुसीबत ढा रही है। साथ ही सरकारी तंत्र भी मददगार साबित नहीं हो रहा। स्थिति यह है कि उर्गम घाटी में आरोसी पिलखी क्षेत्र के कई गांवों की आवाजाही के लिए कल्प गंगा पर बने एकमात्र पैदल पुल के बह जाने के बाद दो माह तक प्रशासन ने क्षेत्र की कोई सुध नहीं ली। नतीजन ग्रामीणों ने कमर कस चार दिनों तक श्रमदान कर दो अस्थायी पुल तैयार लिए।

उर्गम घाटी में कल्प गंगा पर बने स्थायी पुल 2013 में आई बाढ़ में बह गए थे। तब से लोग कल्प गंगा पर पावर हाउस के पास बने अस्थायी पुलों से आवाजाही कर रहे थे। लेकिन, यह पुल भी इस बार जुलाई में बाढ़ की भेंट चढ़ गए। तब से पिलखी, भर्की, अरोसी, भेंटा, ग्वाना सहित अन्य गांवों की लगभग डेढ़ हजार की आबादी तीन किमी का चक्कर काटकर पैदल ही बर्ड़ंगडा होते हुए आवाजाही कर रही थी। इस बीच ग्रामीणों ने कई बार जोशीमठ तहसील प्रशासन को भी इस संबंध में सूचना दी, लेकिन वहां से आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला। ऐसे में ग्रामीणों ने एक सप्ताह पूर्व बैठक कर खुद ही पुल निर्माण का निर्णय लिया।

पहले उन्होंने आरोसी के पावर हाउस के पास कल्प गंगा पर लकड़ी का कच्चा पुल तैयार किया। लेकिन, मुश्किल यह थी कि इस रास्ते घोड़ा-खच्चर नहीं जा सकते थे। जबकि, गांव तक खाद्य-सामाग्री घोड़ा-खच्चर से पहुंचाई जा सकती है। सो ग्रामीणों ने पावर हाउस के फागड़ा तोक में घोड़ा-खच्चर के लिए भी सुरक्षित कच्चा पुल तैयार कर लिया। दोनों पुलों के निर्माण को प्रत्येक परिवार से एक-एक व्यक्ति श्रमदान में शामिल हुआ।

प्रशासन को पानी कम होने का इंतजार

आरोसी गांव के ग्रामीण रघुवीर सिंह चौहान कहते हैं कि प्रशासन शायद कल्प गंगा में पानी कम होने का इंतजार कर रहा है। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सामाग्री की किल्लत थी। लिहाजा अपनी जरूरतों को देखते हुए ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से पुलों का निर्माण किया। पिलखी के ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी कहते हैं कि ग्रामीणों की इस पहल से सामूहिक कार्य की ग्रामीण परंपरा आगे बढ़ी है।

आपदा में ऐसे ही सहयोग भाव से कार्य करें ग्रामीण

उपजिलाधिकारी जोशीमठ योगेंद्र सिंह कहते हैं कि ग्रामीणों की मुश्किलों को देखते हुए प्रशासन ने पुल निर्माण के निर्देश दिए थे। लेकिन, स्थायी पुल के निर्माण में विलंब के चलते ग्रामीणों ने श्रमदान से दो पुल तैयार कर सराहनीय कार्य किया है। प्रशासन ने भी ग्रामीणों की समय-समय पर मदद की। कहते हैं आपदा के दौरान सभी को इसी तरह सहयोग की भावना के साथ कार्य करना चाहिए। प्रशासन के भरोसे ही नहीं रहना चाहिए। 

Edited By: Sanjay Pokhriyal