नई दिल्ली, आनलाइन डेस्‍क। विपक्ष ने रविवार को कांग्रेस की दिग्गज नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मार्गरेट अल्वा को उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया। दिल्‍ली में राकांपा नेता शरद पवार के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर मार्गरेट अल्वा का नाम पर सहमति बनी। विपक्षी दलों की बैठक के बाद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने खुद विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में मार्गरेट अल्‍वा के नाम का एलान किया। 

कई राज्‍यों की रह चुकी हैं राज्‍यपाल 

मारग्रेट अल्वा (Margaret Alva) का जन्म 14 अप्रैल 1942 को मैंगलोर में हुआ। वह पूर्व मद्रास प्रेसीडेंसी के विभिन्न हिस्सों में पली बढ़ीं। अल्वा की शिक्षा दिक्षा बेंगलुरू में हुई। मारग्रेट अल्वा (Margaret Alva) के पिता भारतीय सिविल सेवा में थे। मार्गरेट की शादी 24 मई 1964 को निरंजन अल्वा से हुई। मैंगलोर के अल्वा परिवार में एक मिश्रित संस्कृति है। कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाली अल्‍वा (Margaret Alva) गोवा, गुजरात, उत्तराखंड और राजस्थान की राज्यपाल भी रह चुकी हैं।

लगातार चार साल तक राज्‍यसभा अध्‍यक्ष 

अल्‍वा (Margaret Alva) के ससुराल में लोग राजनीति में थे। इससे वही भी वह राजनीतिक परिदृश्य में आ गईं। वह राज्यसभा के लिए लगातार चार बार और लोकसभा में एक कार्यकाल के लिए चुनी गईं। वह 1974 में 32 साल की उम्र में पहली बार राज्यसभा की सदस्य बनी और लगातार चार कार्यकाल पूरे किए। वर्ष 1999 में वह लोकसभा के लिए भी निर्वाचित हुईं। अल्वा ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के कार्यकाल में कई महत्‍पूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारियां निभाईं।

कांग्रेस ने बताया विविधतापूर्ण देश की प्रतिनिधि 

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवारी मिलने के साथ ही मार्गरेट अल्वा ने सक्रिय राजनीति में एक बार फिर वापसी कर ली है। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2008 में कर्नाटक विधानसभा के चुनाव के बाद वह कुछ समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं थी। बाद में उन्‍हें उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अल्वा को विविधतापूर्ण देश की प्रतिनिधि करार दिया है। अल्वा के बेटे निखिल अल्वा भी राहुल गांधी के करीबी सलाहकारों की टीम में शामिल रहे हैं।

मह‍िला अधिकारों के लिए किया काम 

मार्गरेट अल्वा को 42 साल की उम्र में केंद्रीय मंत्री बनाया गया था, जो उन दिनों दुर्लभ था। साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अल्वा को संसदीय मामलों का राज्य मंत्री बनाया था। उस समय उनकी उम्र महज 42 वर्ष थी। संसद में अपने तीन दशकों के सफर के दौरान मार्गरेट अल्वा ने महिलाओं के अधिकारों, स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण, विवाह कानून और दहेज निषेध संशोधन अधिनियम में हुए संशोधनों में अहम भूमिका निभाई। 

सास और ससुर ने राजनीति में आने को किया प्रोत्‍साहित 

यह भी कहा जाता है कि अल्‍वा को उनके ससुर जोआचिम अल्वा और सास वायलेट अल्वा ने राजनीति में कदम रखने के लिए प्रोत्साहित किया था। बचपन में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया था। अल्‍वा ने कभी भी विपरीत परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्‍होंने स्नातक के बाद कानून की पढ़ाई की। उन्‍होंने कुछ समय के लिए वकालत की प्रैक्टिस भी की। सोनिया गांधी की करीबी अल्‍वा के तीन बेटे और एक बेटी है।अल्वा साल 2004 में लोकसभा चुनाव हार गई थीं तब उन्‍हें पहला और बड़ा राजनीतिक झटका लगा था। 

धनखड़ से मुकाबला 

मार्गरेट अल्‍वा का मुकाबला भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के उम्‍मीदवार जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar is NDA's VP candidate) से होगा। 71 वर्षीय धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्‍यपाल हैं और अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। धनखड़ राजस्थान के झुंझुनूं से आते हैं। अगर धनखड़ जीतते हैं तो भैरोंसिंह शेखावत के बाद वह राजस्थान से दूसरे उपराष्ट्रपति होंगे।

उम्‍मीदवारों की अंतिम सूची 22 जुलाई को

सनद रहे अगले साल राजस्‍थान में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। निर्वाचन आयोग ने 6 अगस्त, 2022 को होने वाले 16वें उपराष्ट्रपति के चुनाव की घोषणा की है। चुनाव आयोग ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को चुनाव के लिए रिटर्निंग आफिसर बनाने का भी निर्देश दिया है। उक्त चुनाव के लिए नामांकन पत्र शनिवार से 19 जुलाई तक जमा किए जा सकते हैं। नामांकन की जांच 20 जुलाई को होगी और उम्‍मीदवारों की अंतिम सूची 22 जुलाई को प्रकाशित की जाएगी।

Edited By: Krishna Bihari Singh