नई दिल्ली, आइएएनएस। देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेताओं, विचारक, लेखक और भारतहेरा विचार केंद्र (बीवीके) के संस्थापक पी परमेश्वर ने शनिवार आधी रात को केरल के पलक्कड़ जिले में अपने दोस्त के घर पर अंतिम सांस ली। पी परमेश्वरनकी उम्र 93 वर्ष की थी। उनका आयुर्वेदिक उपचार चल रहे था जिस वजह से वह अपने दोस्तों के घर पर आराम कर रहे थे।

पी परमेश्वरन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया है। पीएम ने ट्वीट करते हुए लिखा कि एक संस्था के निर्माता, परमेस्वरन जी ने भारतिय विचारधारा, विवेकानंद केंद्र और अन्य प्रख्यात संस्थानों का पोषण किया। मैं खुद को भाग्यशाली समझता हू कि मुझे उनसे कई बार बातचीत करने का मौका मिला। वह एक विशाल बुद्धि थे। उनके निधन से दुखी हूं। 

 

जानकारी के लिए बता दें कि  उनका अंतिम संस्कार सोमवार शाम को आलप्पुझा जिले के मुहामा में उनके गृह नगर में किया जाएगा। दिवंगत परमेश्वरन का शव यहां बीवीके में रखा जाए, जहां उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा जिया था। 

इससे पहले तय किया गया था कि रविवार शाम को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अक्सर उन्हें परमेश्वरनजी कहकर पुकारा जाता था।  वे एक उत्कृष्ट वक्ता थे और आरएसएस के प्रचारक (आयोजक) के रूप में अपना करियर शुरू किया था। 1957 में, उन्हें केरल में भारतेय जनसंघ के निर्माण का कार्य सौंपा गया और वे जनसंघ के उपाध्यक्ष बने।

आपातकाल के दौरान जेल जाने के बाद, वह राजनीति से सामाजिक विचार और विकास के क्षेत्रों में चले गए और चार साल तक नई दिल्ली में दीनदयाल शोध संस्थान के निदेशक बने। 1982 में, वह राज्य की राजधानी में लौट आए जहां उन्होंने बीवीके की स्थापना की। उनका भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ बहुत करीबी संबंध था जैसे एल.के. आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, जो राज्य की राजधानी में होने पर अक्सर उन्हें बुलाते थे। देश ने उन्हें पद्म श्री और पद्म विभूषण से सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने आरएसएस के वयोवृद्ध की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक विचारधारा में डूबे हुए व्यक्ति थे।

Posted By: Ayushi Tyagi

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