नीलू रंजन, नई दिल्ली। आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के सत्यापन का काम शुरू हो गया है। इसके लिए विशेष रूप से विकसित की गई ‘लाभार्थी पहचान प्रणाली’ से सामाजिक व आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है। एसईसीसी के आंकड़ों से ही 10.74 करोड़ गरीब परिवारों की पहचान की गई है, जिन्हें आयुष्मान भारत के तहत सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज मुहैया कराया जाएगा। वहीं योजना के स्वरूप और तैयारियों को देखते हुए इसके 15 अगस्त से लांच होने की उम्मीद कम दिख रही है।

आयुष्मान भारत से जुड़े स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एसईसीसी के साथ-साथ पहले से चल रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों का डाटा पहले ही ‘लाभार्थी पहचान प्रणाली’ में डाल दिया गया है। अब जगह-जगह पायलट प्रोजेक्ट लगाकर यह चेक किया जा रहा है कि प्रणाली के डाटा से असली लाभार्थी मेल खाते हैं या नहीं। इसके परिणाम के अनुसार सिस्टम में जरूरी बदलाव किये जाएंगे।

वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ‘लाभार्थी पहचान प्रणाली’ के साथ आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के सत्यापन का पायलट प्रोजेक्ट सोनीपत के हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दादरी में शुरू किया गया था, जो काफी सफल रहा। सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों को आयुष्मान भारत के बारे में पहले से जानकारी थी और उन्होंने सत्यापन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आने वाले दिनों में इसी तरह का पायलट प्रोजेक्ट झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी शुरू करने की योजना है।

योजना गांधी जयंती पर हो सकती है लांच
वहीं राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों के साथ समझौता होना बाकी है। माना जा रहा है कि सारी तैयारियां पूरी होने के बाद गांधी जयंती यानी दो अक्टूबर से इस योजना को लांच कर दिया जाएगा। 

15 अगस्त से लांच होने की उम्मीद कम
आयुष्मान भारत की तैयारियों को देखते हुए इसके 15 अगस्त से लांच होने की उम्मीद कम है। योजना से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि अभी काफी काम बाकी है। इस योजना से निजी अस्पतालों को जोड़ने के लिए इलाज की लागत को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके बाद ही उनके साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये जाएंगे।

By Digpal Singh