टाटा ट्रस्ट्स की अंदरूनी लड़ाई आई सामने, नोएल गुट ने वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर लगाए गंभीर आरोप
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट्स (एसडीटीटी) के वरिष्ठ ट्रस्टियों ने अपने साथियों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर बोर्ड के प्रस्तावों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर बोर्ड के प्रस्तावों को कमजोर करने का आरोप
HighLights
वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर बोर्ड के प्रस्तावों को कमजोर करने का आरोप
टाटा ट्रस्ट्स ने इन दोनों ट्रस्टियों पर टाटा संस की लिस्टिंग का समर्थन करके जिम्मेदारियों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया
आईएएनएस, नई दिल्ली। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट्स (एसडीटीटी) के वरिष्ठ ट्रस्टियों ने अपने साथियों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर बोर्ड के प्रस्तावों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा, वरिष्ठ ट्रस्टियों ने इन दोनों ट्रस्टियों पर टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की लिस्टिंग का सार्वजनिक रूप से समर्थन करके अपनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन का भी आरोप लगाया है।
एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि एसडीटीटी ट्रस्टी नोएल टाटा, डेरियस जे खंबाटा, नेविल एन टाटा और भास्कर भट द्वारा हस्ताक्षरित किए गए पत्र में टाटा संस के भविष्य के मालिकाना हक और लिस्टिंग स्टेटस को लेकर टाटा ट्रस्ट के अंदर चल रहे मतभेदों का पता चलता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस बोर्ड ने मार्च 2024 में एकमत से कंपनी की गैर सूचीबद्ध स्थिति बनाए रखने का फैसला किया था। वहीं एसडीटीटी और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने जुलाई 2025 में एकमत से इस रुख को दोहराया और इस मामले पर आरबीआई से बात करने पर सहमत हुए।
इसके अलावा, ट्रस्टियों ने कहा कि जुलाई 2025 के प्रस्तावों को रद नहीं किया गया था और उन्होंने श्रीनिवासन और सिंह की आलोचना की कि उन्होंने उन फैसलों पर दोबारा विचार करने की मांग नहीं की या संभावित लिस्टिंग पर अपने बदले हुए विचारों को ट्रस्टियों के सामने नहीं रखा।
टाटा संस की लिस्टिंग का समर्थन करने वाले इन दोनों ट्रस्टियों के सार्वजनिक बयानों ने दोनों ट्रस्ट के प्रस्तावों को कमजोर किया और यह आरबीआइ के पास टाटा संस के लंबित आवेदन पर भी असर डालता है।
ट्रस्ट्स ने वहीं किया जो टाटा संस के बोर्ड ने कहा
ट्रस्टियों ने 28 सितंबर के टाटा इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम्स साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को टाटा संस के साथ विलय करने के प्रस्ताव का जिक्र किया, जिससे होल्डिंग कंपनी को अपनी अनलिस्टेड स्थिति बनाए रखते हुए एनबीएफसी के लिए आरबीआइ के मानदंडों से बचने में मदद मिल सके।
रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि टाटा संस के बोर्ड ने दोनों ही ट्रस्ट्स से आरबीआइ के नियमों का पालन करने के लिए सभी उपलब्ध विकल्पों का आकलन करने और अकेले सूचीबद्ध नहीं करने के लिए कहा था।
ट्रस्टियों ने पत्र में कहा, टाटा ट्रस्ट्स ने वही किया जो टाटा संस के बोर्ड ने उनसे कहा था। इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक लिस्टिंग के विकल्प खोजने के अपने प्रयासों का बचाव किया।
