रात 1 बजे तोड़ा स्टीयरिंग लॉक, चुपचाप उठा ले गए ट्रक; SC का फाइनेंसर को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि फाइनेंस कंपनियां EMI डिफॉल्ट पर बलपूर्वक या चुपचाप वाहन जब्त नहीं कर सकतीं।

वाहन जब्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला। (फाइल फोटो।)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्ज वसूली और वाहन जब्ती को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि फाइनेंस कंपनियां या बैंक ईएमआई (EMI) डिफॉल्ट होने पर बलपूर्वक या आधी रात को चुपचाप गाड़ी का ताला तोड़कर उसे जब्त नहीं कर सकतीं।
गिरवी रखे गए वाहनों को वापस पाने के लिए फाइनेंसरों द्वारा ताकत के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक फाइनेंसर को उस ट्रक मालिक को 15 लाख रुपये देने का आदेश दिया है, जिसने वाहन खरीदने के लिए 10.4 लाख रुपये का लोन लिया था।
क्या है मामला?
जून 2021 में लोन मंजूर होने के लगभग दो साल बाद चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस ने ईएमआई का भुगतान न करने पर चुपके से ट्रक वापस ले लिया। 9 अप्रैल, 2023 को अयोध्या के एक गोदाम के सीसीटीवी फुटेज में चार लोगों को रात करीब 1 बजे वाहन का स्टीयरिंग लॉक तोड़ते और उसे ले जाते हुए देखा गया।
छह महीने बाद चोलामंडलम ने एक नोटिस भेजा जिसमें कहा गया कि उसने वाहन वापस ले लिया है और उसे 4.5 लाख रुपये में नीलाम कर दिया है और 1.3 लाख रुपये की बकाया राशि का भुगतान अभी भी उसे करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हालांकि गिरवी रखे गए वाहन को वापस लेना फाइनेंस किए गए एसेट को सुरक्षित करने का एक सही कदम है, लेकिन यह कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए और इसकी प्रक्रिया 5 मई, 2003 को जारी उधारदाताओं के लिए फेयर प्रैक्टिस कोड पर आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार होनी चाहिए।
