नई दिल्ली, प्रेट्र। मेटल व माइनिंग क्षेत्र की दिग्गज वेदांता रिसोर्सेज पांच साल में 10 अरब डॉलर (करीब 67,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। कंपनी यह राशि कारोबार के विस्तार पर खर्च करेगी। कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की जनवरी से मार्च की तिमाही में केयर्न इंडिया और हिंदुस्तान जिंक का वेदांता के साथ विलय पूरा होने की संभावना है।

इससे वेदांता प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में विविध कारोबार वाली भारत की सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी। इस तरह यह बीएचपी बिलिटॉन और वेले एसए जैसे ग्लोबल दिग्गजों को कड़ी टक्कर दे सकेगी। पिछले साल केयर्न इंडिया के शेयरधारकों ने इस विलय को हरी झंडी दे दी थी। वेदांता लिमिटेड और लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड वेदांता रिसोर्सेज के शेयरधारक भी इस विलय को मंजूरी दे चुके हैं।

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अनिवासी भारतीय उद्योगपति अग्रवाल ने कहा, 'हमारे पास पांच साल में दस अरब डॉलर निवेश की क्षमता है। हम सालाना तीन लाख 50 हजार बैरल कच्चा तेल के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम अल्युमिनियम में 30 लाख टन सालाना क्षमता तैयार करने की कोशिश में हैं। इसी तरह 10 लाख टन से अधिक जस्ता व सीसा (लेड) और 1,000 टन चांदी उत्पादन पर नजर है। यही नहीं, हम राजस्थान में डीएपी उत्पादन के लिए दस लाख टन वार्षिक क्षमता वाला फर्टिलाइजर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

वेदांता रिर्सोसेस की सहयोगी केयर्न रोजाना दो लाख बैरल तेल व समतुल्य गैस का उत्पादन करती है। कंपनी की इसमें एक लाख प्रतिदिन की वृद्धि करने की योजना है। कंपनी का कारोबार भारत, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, जांबिया, नामीबिया, आयरलैंड, लाइबेरिया और ऑस्ट्रेलिया में फैला हुआ है।

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Posted By: Kishor Joshi

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