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वीबी-जी राम जी: केंद्र ने 375 कामों को दी मंजूरी, 41 प्रतिशत बढ़ा रोजगार का दायरा; क्या-क्या बदलेगा?

Published: Tue, 06 Oct 2026 08:12 PM (GMT+05:30)

केंद्र सरकार ने मनरेगा के स्थान पर लाई गई वीबी-जी रामजी योजना के तहत 375 तरह के कामों को मंजूरी ...और पढ़ें

जल सुरक्षा और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान।

जल सुरक्षा और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान।

HighLights

  1. वीबी-जी रामजी योजना में 375 तरह के काम शामिल।

  2. जल सुरक्षा, आजीविका, कृषि प्रसंस्करण पर विशेष जोर।

  3. ग्रामीण कारोबार और आय के नए रास्ते खुलेंगे।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मनरेगा के बदले लाई गई योजना वीबी-जी रामजी में काम के दायरे में 41 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसके तहत अब 375 तरह के काम कराए जा सकते हैं। पहले यह संख्या 266 थी। सबसे ज्यादा 128 काम जल सुरक्षा से जुड़े हैं।

कृषि उपज की सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, मिनी आटा मिल, मशरूम, पाली हाउस, डेयरी एवं मत्स्यपालन से जुड़ा ढांचा भी बनाया जा सकेगा, ताकि रोजगार का दायरा सिर्फ मजदूरी तक सीमित न रहकर अन्य ग्रामीण कारोबार से भी जुड़ सके।

सूची में चार क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। जल सुरक्षा के 128, आधारभूत ढांचे के 111, आजीविका से जुड़े 98 और आपदा से बचाव के 38 काम शामिल हैं। रोजगार के लिए निर्धारित राशि से अब ऐसे निर्माण भी होंगे, जो गांवों में कमाई के नए रास्ते खोल सकते हैं।

जल सुरक्षा में चेक डैम, नदी-नालों का पुनर्जीवन, जलभराव वाली जमीन का सुधार और वर्षा जल संचयन जैसे काम शामिल हैं। सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सुविधाओं को भी जगह मिली है। इसका सीधा लाभ खेती को हो सकता है। जहां पानी की कमी के कारण किसान एक फसल तक सीमित रहते हैं, वहां दूसरी फसल और सब्जी जैसी अधिक आय वाली फसलों का रास्ता खुल सकता है।

जाहिर है, पानी से जुड़े काम अब सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं रहेंगे। जल संरचनाएं बनने पर उनकी देखरेख, सिंचाई एवं कृषि गतिविधियों से भी रोजगार बढ़ेगा।

सबसे बड़ा बदलाव आजीविका से जुड़े 98 कामों में है। पिछली व्यवस्था में ऐसे कामों की हिस्सेदारी महज 1.1 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 26 प्रतिशत हो गई है। कृषि उपज की सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और प्रसंस्करण के लिए स्थानीय ढांचा बनने से गांव में ही फसल को बाजार योग्य बनाने का अवसर मिलेगा।

इससे किसान मक्का, फल, सब्जी जैसी उपज को सीधे बेचने के बजाय उसकी सफाई-छंटाई, पैकेजिंग और प्रसंस्करण करके अधिक मूल्य पर बेच सकेगा। इससे मजदूरी के साथ मशीन संचालन, पैकिंग, भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़े काम भी पैदा हो सकते हैं। कोल्ड स्टोरेज बनने से जल्दी खराब होने वाली उपज को बेहतर बाजार मिलने पर बेचने की संभावना बढ़ेगी।

मिनी आटा मिल, डेयरी, मशरूम, पाली हाउस एवं मत्स्यपालन से जुड़े तंत्रों का असर भी इसी तरह होगा। स्वयं सहायता समूहों के लिए कार्यशाला, एसएचजी मार्ट और प्रशिक्षण केंद्र भी ग्रामीण महिलाओं को उत्पादन से बाजार तक जोड़ने में मदद कर सकते हैं।

नई व्यवस्था में काम ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से जरूरत के आधार पर तय होंगे और ग्रामसभा की मंजूरी से आगे बढ़ेंगे। मतलब यह कि पानी की किल्लत वाले गांवों में जल संरक्षण को प्राथमिकता मिल सकती है और जिस क्षेत्र में कृषि उपज का उत्पादन अधिक है, वहां प्रसंस्करण या भंडारण का ढांचा विकसित किया जा सकता है।

कृषि संबंधित गतिविधियों से 181 काम जुड़े हैं। इनमें 52 काम लाभार्थी आधारित हैं। 107 काम अंत्योदय और कमजोर परिवारों के लिए चिह्नित हैं। आपदा से बचाव की श्रेणी भी बनाई गई है, जिसमें 38 तरह के काम होंगे। राहत केंद्र, तटबंध मजबूत करना, आपदा के बाद सड़कों एवं परिसंपत्तियों की मरम्मत तथा जंगल की आग से बचाव जैसे काम कराए जा सकेंगे।