नई दिल्‍ली, जेएनएन। Van Mahotsav 2020 कुदरत ने चुनिंदा चीजें ही ऐसी बनाई है जिसका हर अंग उपयोगी है। पौधे उसी में से एक हैं। जड़, तना, पत्ती, छाल, फल और फूल तक की उपयोगिता वाले पौधों की दुनिया एकदम निराली है। ये निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करते हैं। आइए, जानते हैं कि पौधे हमें किस तरीके से फायदा पहुंचाते हैं:

12 किग्रा एक सामान्य पेड़ साल भर में 12 किग्रा कार्बन डाईऑक्साइड को सोख लेता है। यही पेड़ साल भर में चार व्यक्तियों को जितनी ऑक्सीजन की जरूरत होती है, उतनी मात्रा में प्राणवायु उन्मुक्त करता है।

भोजन के लिए: पौधों की तीन हजार प्रजातियों का इंसान खाद्य के रूप में इस्तेमाल करता है। दुनिया का 90 फीसद खाद्य पदार्थ पौधों की केवल 20 प्रजातियों से तैयार होता है।

उपयोगी पौधे : नीम, इमली, पीपल, पाकड़, जामुन, आम, बरगद, और बेल के छायादार पेड़ों में पर्यावरण सुधारने की क्षमता है। इनकी व्यापक कैनोपी अधिक मात्रा में कार्बन डाईऑक्साइड सोखकर ऑक्सीजन में तब्दील करती है। गहराई तक इनकी जड़ें बारिश के पानी को धरती को कोख तक पहुंचाकर न केवल भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाती हैं बल्कि मजबूती के साथ मिट्टी कटाव भी रोकती हैं। इनके फल व पत्तियां जमीन में मिलकर उसकी उर्वरा शक्ति में इजाफा करते हैं। इनके फल कीट, पक्षी और जानवर खाकर पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाते हैं। क्षेत्रीय प्रजातियों के पौधरोपण से पारिस्थितिकी तंत्र नहीं गड़बड़ाता है।

विशेषज्ञ बोले: वनस्पतिशास्त्रियों के अनुसार सड़कों और राजमार्गों के किनारे छायादार और ऑक्सीजन देने वाले पीपल, बरगद, नीम, जामुन, कटहल, अर्जुन आदि लगाने चाहिए। आर्थिक उपयोग के लिए आम, अमरूद, आंवला के अलावा प्रकाष्ठ के लिए पोपलर लगाना पर्यावरण संगत है।

प्रदूषण के रामबाण: धूल, तापमान और अन्य उत्सर्जनों को रोकने वाले: अमलतास, नीम, शीशम, बांस, पीपल, मोलश्री, आम, जामुन, अर्जुन, सागवान और इमली 

कूड़ा-करकट वाली जमीन को उपयोगी बनाने में सक्षम पौधे: अर्जुन, गुलमोहर, सिरस, बबूल, अमलतास, कदंब  

ध्वनि प्रदूषण रोकने वाले पौधे: अशोक, नीम, कचनार, बरगद, पीपल, सेमल गैसीय प्रदूषकों से निपटने में सक्षम पौधे: बेल, उलु-नीम, सिरस, नीम, बोगनविलिया, पीपल, शीशम, इमली भूमि सुधारक पौधे सीएसआइआर ने रिवाइटालाइजेशन ऑफ मार्जिनल वेस्टलैंड परियोजना के तहत ऊसर, क्षारीय, लवणयुक्त या भारी धातुओं के चलते बंजर हो गई जमीन के सुधार हेतु औषधीय एवं सुगंधित पौधों को चिह्नित किया है। इसमें नींबूघास, वेटीवर. कैमोमिल, कालमेघ, खस, जावा घास, सेट्रोनिला आदि शामिल हैं। वैज्ञानिकों द्वारा ऊसर व क्षारीय भूमि पर इनका परीक्षण किया जा चुका है।

औषधीय व सुगंधित पौधे: औषधीय गुणों की दो हजार से ज्यादा देसी प्रजातियों और सुगंधित गुणों वाली 1300 प्रजातियों की खास पहचान है। आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा जैसी देशज पद्धतियों में इनकी विशेष मांग है।

औषधि के लिए: दुनिया में उपयोग की जाने वाली 80 फीसद दवाएं पौधों से हासिल की जाती हैं। कुल पादप प्रजातियों में से केवल दो फीसद में ही औषधीय क्षमता का परीक्षण किया जा सका है। सभी प्रजातियों में इस क्षमता का परीक्षण किए जाने पर स्थिति कुछ और ही होगी।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस