नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच में गवाही के लिए आगे किन लोगों को बुलाया जाए इस पर पेंच फंस गया है। विपक्ष गवाही के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष बुलाने पर अडिग है। जबकि, जेपीसी सचिवालय ने गवाहों की सूची में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम भी शामिल कर दिया। तीखे वाद-विवाद के बाद यह सूची वापस ले ली गई और गवाहों के नाम फिर से तय करने का फैसला हुआ।

मंगलवार को जेपीसी की बैठक शुरू होते ही कुछ सदस्यों ने गवाहों की सूची की मांग करनी शुरू कर दी। सूत्रों के मुताबिक समिति के चेयरमैन पीसी चाको ने कहा कि उन्होंने अभी सूची नहीं देखी है। लेकिन, सदस्यों की मांग पर जब सूची बांटी गई तो वाजपेयी और पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नाडिस समेत राजग शासन के समय संचार मंत्रालय संभाल चुके सभी मंत्रियों और संबंधित मंत्रिसमूह (जीओएम) से जुड़े मंत्रियों के नाम भी शामिल थे। सूची में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का नाम भी था। वाजपेयी ने जगमोहन के बाद कुछ दिनों के लिए संचार मंत्रालय का कार्यभार संभाला था। इस पर विपक्ष के कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि इस सूची में मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम क्यों नहीं है?

कुछ सदस्यों ने वाजपेयी और जॉर्ज की सेहत का हवाला देते हुए कहा कि गवाहों की सूची में उनका नाम आना पूरी जेपीसी के लिए शर्मनाक होगा। इस पर चाको ने माना कि यह चूक सचिवालय से हुई है। उन्होंने सफाई दी कि सोमवार देर रात ही दिल्ली आने की वजह से उन्होंने गवाहों की सूची नहीं देखी थी और सदस्यों के जोर देने पर उसे वितरित करना पड़ा। गवाहों के नाम पर बहस बढ़ती देख कुछ सदस्यों ने सूची वापस लेकर नई सूची तैयार करने का सुझाव दिया। चाको को सुझाव दिया गया कि वह सभी दलों से अलग-अलग विचार-विमर्श कर सूची तैयार करें। बाद में तय हुआ कि अब चाको की देखरेख में नई सूची तैयार होगी जो जेपीसी की 10 जुलाई को होने वाली अगली बैठक में रखी जाएगी।

ईडी के अधिकारियों को फटकार

वित्त सचिव आरएस गुजराल के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी मंगलवार को जेपीसी के समक्ष पेश हुए। जांच की धीमी रफ्तार के लिए सदस्यों ने उन्हें फटकार लगाई।

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