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नमामि गंगे प्रोजेक्ट हुआ सफल, उत्तरकाशी में अब सीधे गंगा में नहीं गिरेगा गंदा पानी

Published: Sat, 11 Jul 2026 06:01 AM (IST)Updated: Sat, 11 Jul 2026 07:07 AM (IST)

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने कहा है कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी में नमामि गंगे योजना के तहत विकसित सीवरेज ...और पढ़ें

उत्तरकाशी का सीवरेज नेटवर्क बना गंगा संरक्षण की मजबूत कड़ी: नमामि गंगे (फाइल फोटो)

उत्तरकाशी का सीवरेज नेटवर्क बना गंगा संरक्षण की मजबूत कड़ी: नमामि गंगे (फाइल फोटो)

HighLights

  1. स्रोत पर गंगा की स्वच्छता बनाए रखने से ऋषिकेश, हरिद्वार से लेकर वाराणसी तक मिलेगा बेहतर जल

  2. 15 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी, उपचारित अपशिष्ट जल ही अब भागीरथी में छोड़ा जा रहा

पीटीआई, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने कहा है कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी में नमामि गंगे योजना के तहत विकसित सीवरेज नेटवर्क गंगा की स्वच्छता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।

मिशन के अनुसार, गंगा की शुद्धता उसके उद्गम क्षेत्र से ही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है, ताकि नदी का स्वच्छ और अविरल प्रवाह निचले इलाकों तक भी बना रहे। उत्तरकाशी में भागीरथी नदी आगे चलकर अलकनंदा से संगम के बाद गंगा का स्वरूप ग्रहण करती है।

एनएमसीजी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में नदी को प्रदूषण से बचाना पूरे गंगा बेसिन के लिए महत्वपूर्ण है। यदि भागीरथी का जल स्रोत से ही स्वच्छ रहेगा, तो इसका लाभ ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों तक पहुंचेगा।

मिशन ने इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर कहा कि गंगा की सुरक्षा की शुरुआत उसके उद्गम स्थल से ही होनी चाहिए।मिशन के अनुसार, उत्तरकाशी में सीवरेज नेटवर्क का पुनर्निर्माण चुनौतीपूर्ण था।

प्राकृतिक आपदाओं से बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो चुका था, जबकि पहाड़ी ढलानों, सीमित स्थान और कठोर चट्टानों के कारण निर्माण कार्य भी कठिन था।

इसके बावजूद 2015 में शुरू हुई परियोजना को 2017 में गति दी गई और 2018 में ग्यासू स्थित दो एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उन्नयन पूरा किया गया।

करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से दोनों स्वीकृत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। अब शहर का अपशिष्ट जल शोधन के बाद ही भागीरथी में छोड़ा जा रहा है।

एनएमसीजी का कहना है कि स्रोत पर नदी की स्वच्छता सुनिश्चित करना पूरी गंगा की पारिस्थितिकी और जल गुणवत्ता की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।