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ट्रंप के टैरिफ से चीन को राहत, रूसी तेल विवाद पर हरदीप पुरी बोले- हमारे पास प्लान-बी तैयार

Published: Fri, 25 Sep 2026 08:45 PM (IST)

ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दंडात्मक शुल्क लगाने के कानून के बावजूद चीन को भविष्य ...और पढ़ें

रूसी तेल आयात विवाद पर हरदीप पुरी बोले- वैकल्पिक व्यवस्था तैयार (फाइल फोटो- PTI )

रूसी तेल आयात विवाद पर हरदीप पुरी बोले- वैकल्पिक व्यवस्था तैयार (फाइल फोटो- PTI )

HighLights

  1. अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर चीन को टैरिफ से छूट दी।

  2. बुसान समझौते की अवधि 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाई गई।

  3. भारत के पास ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक दंडात्मक शुल्क लगाने का कानून बनने के बाद ट्रंप प्रशासन ने चीन को भावी अतिरिक्त शुल्क के दायरे से फिलहाल अलग रखने का रास्ता निकाल लिया है।

बुधवार को अमेरिका और चीन के बीच ‘बुसान समझौते’ की अवधि 10 नवंबर 2026 से बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 कर दी गई। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाने को बाध्य हैं।

ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर दंडात्मक टैरिफ का प्रावधान व्यावहारिक रूप से भारत को निशाने पर रखकर तो नहीं बनाया गया। इस बारे में भारत या अमेरिका की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

इसी बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का पूरा इंतजाम कर लिया गया है और भारत के पास वैकल्पिक व्यवस्था तैयार है।

अमेरिका के ट्रेजरी सचिव (वित्त मंत्री) स्काट बेसेंट ने बुधवार को बताया है कि अमेरिका और चीन ‘बुसान समझौते’ को 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। यह समझौता अक्टूबर 2025 में दक्षिण कोरिया के बुसान में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग की मुलाकात के बाद बना था।

मूल रूप से यह 10 नवंबर 2026 तक लागू रहना था। विस्तार के बाद दोनों पक्ष इस अवधि तक एक-दूसरे पर नया अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाएंगे। वैसे यहां साफ कर दें कि अमेरिका या चीन की तरफ से यह नहीं बताया गया है कि बुसान समझौते की अवधि आगे बढ़ने से ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ अब लागू नहीं होगा।

इस छूट को लेकर शुक्रवार को जारी ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिसिएटिव (जीटीआरआइ) की रिपोर्ट कहती है कि, “चीन ने भावी अमेरिकी शुल्कों से अपने आपको सुरक्षित कर लिया है। अब रूसी तेल का भारत की एकमात्र प्रमुख आयातक बचा है। यह बताता है कि रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने का मामला असलियत में भारत को परेशान करने के लिए बनाया गया है।

पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर भारत पर 25 फीसद का अतिरिक्त शुल्क लगाया था जबकि चीन को छूट दे दी थी।” राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर किया था। इसके तहत उन्हें 17 अक्टूबर तक रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले शीर्ष देशों पर 100 फीसद तक टैक्स लगाना होगा।

पेट्रोलियम मंत्री पुरी का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण पारंपरिक आपूर्ति मार्ग बाधित होने और ऊर्जा बाजारों पर भारी दबाव पड़ने के बावजूद भारत की पहले से की गई तैयारी और समय पर लिए गए फैसलों ने देश में ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। यह स्थिति आगे भी बनी रहेगी।