नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात से ठीक पहले भारत को आतंकवाद के खिलाफ रणनीति में बड़ी सफलता मिली। अमेरिका ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया है। इसके लिए अमेरिका ने कश्मीर में हुए आतंकी हमलों को मुख्य आधार बनाया है। आतंकी सरगना को मोहम्मद यूसुफ शाह के नाम से भी जाना जाता है। भारत ने अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है।

अमेरिका के इस फैसले से पाकिस्तान को झटका लगेगा। यह संदेश अंतरराष्ट्रीय जगत में जाएगा कि पाक आतंकी संगठनों को पनाह दे रहा है। सोमवार की देर रात अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि पिछले साल कश्मीर में हुए आतंकी हमलों में सलाहुद्दीन का हाथ था।

सैयद सलाहुद्दीन वैसे तो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय है, पर रहता पाकिस्तान में है। वहीं से अपनी आतंकी गतिविधि चलाता है। कश्मीर में सेना से मुकाबले के लिए वह बड़े पैमाने पर युवकों को आतंकी बनने का प्रशिक्षण दे रहा है। उसने 2016 में एलान किया था कि वह कश्मीर समझौता कभी नहीं होने देगा। इसके बाद उसने कश्मीर में कई बम धमाके कराए। अप्रैल 2014 में किए गए हमले में 17 लोग जख्मी हुए थे। 

संपत्ति और खाते जब्त

अमेरिका के इस निर्णय के बाद सलाहुद्दीन को अमेरिकी क्षेत्र में निषिद्ध कर दिया गया है। उसकी संपत्ति और बैंक खाते अमेरिका में जब्त माने जाएंगे। वहां के किसी नागरिक से अब वह आर्थिक लेनदेन भी नहीं कर सकेगा।

कौन है सलाहुद्दीन

भारत सरकार सैयद सलाहुद्दीन को कई आतंकवादी घटनाओं के लिए जिम्मेदार मानती है। भारत ने मई 2011 में पाकिस्तान को 50 मोस्ट वांटेड लोगों की सूची सौंपी थी। इसमें सलाहुद्दीन का भी नाम था। जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले की जिम्मेदारी यूनाइटेड जिहाद काउंसिल ने ली थी। इसका प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन ही है। सलाहुद्दीन ने यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की और इसी दौरान वो जमीयत-ए-इस्लामी के संपर्क में आया। यूनिवर्सिटी में रहने के दौरान ही सलाहुद्दीन मदरसे में शिक्षक बन गया। 

उसने 1987 में मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के टिकट पर श्रीनगर की अमीराकदाल विधानसभा से इलेक्शन भी लड़ा, लेकिन वो हार गया। 1989 में अपनी गिरफ्तारी और रिहाई के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद हिजबुल मुजाहिदीन का सरगना बन गया। यूनाइडेट जिहाद काउंसिल दरअसल गुलाम कश्मीर में सक्रिय दर्जन भर से अधिक आतंकवादी संगठनों का गठबंधन है। इन संगठनों में हिजबुल मुजाहिदीन, अल-उमर मुजाहिदीन, तहरीक-उल मुजाहिदीन आदि शामिल हैं। 

डीपीएस से आतंकियों की चल रही थी पाक में कमेंटरी

 पिछले दिनों कश्मीर में सीआरपीएफ पर हुए हमले में आतंकी सरगना हाफिज सईद के संगठन जमात उद दावा के शामिल होने के सुबूत सामने आए हैं। जमात के लाहौर स्थित मुख्यालय का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें दिखता है कि वहां बैठा एक व्यक्ति श्रीनगर के डीपीएस स्कूल में चल रहे आतंकी हमले की लाइव कमेंट्री कर रहा था। इस शख्स को लश्कर का मुजाहिदीन बताया जा रहा है। उसके साथ हाफिज सईद का साला हाफिज अब्दुल रहमान मक्की भी बैठा दिख रहा है। गौरतलब है कि जमात उद दावा की कमान फिलहाल मक्की के हाथ में ही 

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