UPI चार्ज को लेकर संसद की समिति में हंगामा, विपक्षी सांसदों ने सरकार के फैसले को बताया 'जनविरोधी'
भारत में 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर UPI चार्ज लगाने के फैसले पर संसद की स्थायी समिति में विपक्षी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

यूपीआई विवाद।
HighLights
विपक्षी सांसदों ने 2000 रुपये से अधिक के UPI चार्ज पर आपत्ति जताई।
वित्त मंत्रालय- UPI चार्ज ग्राहकों पर नहीं, मर्चेंट पर लगेगा।
संसदीय समिति में जीडीपी गणना और डिजिटल एसेट्स पर भी चर्चा हुई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में डिजिटल पेमेंट के सबसे लोकप्रिय माध्यम यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) को लेकर एक बड़ी राजनीतिक और आर्थिक चर्चा छिड़ गई है। ऐसे में अब संसद की एक स्थायी समिति की बैठक में विपक्षी सांसदों ने 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर चार्ज (MDR) लगाने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। सांसदों का कहना है कि इस फैसले से देश भर में नाराजगी का माहौल है।
समझिए UPI पेमेंट पर चार्ज का पूरा विवाद क्या है?
बता दें कि UPI को लेकर यह पूरा विवाद तब बढ़ गया, जब केंद्र सरकार ने लगभग 6 वर्षों तक पूरी तरह मुफ्त रहे UPI ट्रांजैक्शन के नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत 15 अक्टूबर से मर्चेंट्स को 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4% की दर से चार्ज (MDR) चुकानी होगी।
मामले में वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि यह चार्ज आम ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा, बल्कि यह मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम का हिस्सा है। ग्राहकों के लिए सामान्य लेनदेन और छोटे पेमेंट पूरी तरह मुफ्त रहेंगे और उन पर कोई मासिक सीमा या चार्ज नहीं लगेगा।
विपक्षी सांसदों ने फैसले को बताया जनविरोधी
ऐसे में अब आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन समेत कई विपक्षी सांसदों ने इसे एकतरफा और पूरी तरह जनविरोधी फैसला करार दिया है। उनका कहना है कि इस निर्णय से देश की एक बहुत बड़ी आबादी प्रभावित होगी, क्योंकि रोजाना लाखों ऐसे लेनदेन होते हैं।
संसदीय समिति में उठा मामला
UPI चार्ज को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार को वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में यह मुद्दा गर्माया। हालांकि समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने बताया कि यह विषय आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं था, लेकिन सांसदों ने इस पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।
चूंकि मौजूदा समिति का कार्यकाल अक्टूबर में समाप्त हो रहा है, इसलिए अध्यक्ष का मानना है कि इस मुद्दे को नई समिति की आगामी बैठकों में औपचारिक रूप से उठाया जा सकता है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने क्या कहा?
मामले में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि संसद समितियों की कार्यवाही गोपनीय होती है, लेकिन जब देश के आम लोग किसी मुद्दे से परेशान होते हैं, तो उसकी गूंज समिति की बैठकों में जरूर सुनाई देती है।
GDP की गणना पर भी उठे सवाल
गौर करने वाली बात यह भी है कि संसदीय बैठक में केवल यूपीआई ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि दर के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाए गए। इस बात को ऐसे समझिए कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 6.9 प्रतिशत थी।
विपक्षी दलों ने जीडीपी की गणना करने के तरीके और बेस ईयर बदलने पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मांग की है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि गणना के दौरान कौन से नए पैरामीटर जोड़े गए हैं और किन पुराने इंडेक्स को हटाया गया है, ताकि पहली तिमाही के सही आंकड़ों का पता चल सके।
वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर भी चर्चा
इतना ही नहीं समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने बताया कि बैठक में 'वर्चुअल डिजिटल एसेट्स' के मुद्दे पर भी अंतिम दौर की चर्चा हुई। समिति पिछले एक साल से आरबीआई (RBI), सीबीटीडी (CBDT) और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ इस पर बातचीत कर रही है और जल्द ही संसद को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
महताब ने चिंता जताई कि सरकार भले ही इन संपत्तियों को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रही है, लेकिन इन्हें विनियमित (Regulate) न करने से अवैध गतिविधियों का खतरा बढ़ सकता है।
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