अयोध्या [जासं]। अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा पर प्रतिबंध से संत-महंत भड़क गए हैं। विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेता परिक्रमा के फैसले पर अडिग है। इन सभी ने प्रतिबंध को राजनीतिक फैसला बताकर लाठी-गोली खाकर भी परिक्रमा करने का संकल्प दोहराया है।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने कहा कि प्रतिबंध का निर्णय राजनीतिक है। इससे कानून व्यवस्था का कोई लेना-देना नहीं है। यह ठीक उसी तरह का प्रतिबंध है जैसा 1992 में विवादित ढांचा गिरने से पहले लगाया गया था। उन्होंने कहा कि हर हाल में अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा होगी। 21 अगस्त के बाद कारसेवकपुरम में बड़ी बैठक कर संत आगे की रणनीति का खुलासा करेंगे।

रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि परिक्रमा पूरी तरह धार्मिक है और यह संतों का अधिकार है। शासन-प्रशासन को विवेक का इस्तेमाल कर निर्णय लेना चाहिए। अयोध्या में विहिप के आंदोलनों में व्यवस्था संबंधी दायित्व निभाते चले आ रहे पूर्व मंत्री लल्लू सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह यादव एक बार फिर 1989-90 जैसी गल्ती दोहराने जा रहे हैं। संत धर्माचायरें के नेतृत्व में हिंदू समाज इसका पूर्व की भांति ही मुंहतोड़ जवाब देगा।

न्यास के वरिष्ठ सदस्य व पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि 25 अगस्त से प्रस्तावित संतों की परिक्रमा हर हाल में होकर रहेगी। लाठी-गोली खाकर भी संत-महंत परिक्रमा के लिए तैयार हैं। वेदांती ने कहा कि परिक्रमा पर प्रतिबंध के पीछे सरकार के वरिष्ठ मंत्री आजम खां षडय़ंत्र है, वरना सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री अखिलेश ने तो सहयोग का भरोसा दिलाया था।

दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि मुलायम से मिलकर परिक्रमा के लिए सहयोग मांगने का निर्णय कतई ठीक नहीं था। पर उन्हें प्रतिबंध पर कोई आश्चर्य नहीं है। संत-महंत व रामभक्त हर हाल में परिक्रमा के लिए संकल्पित है। विहिप के क्षेत्रीय धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख देवेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि प्रतिबंध से परिक्रमा द्वारा किया जाने वाला जनजागरण का काम बहुत हद तक पूरा हो गया है। विहिप के साकेत विभाग के संरक्षक व चौबुर्जी मंदिर के महंत बृजमोहन दास ने दावा किया कि भीषण संघर्ष के लिए संत कमर कस चुके हैं। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा के मुताबिक प्रतिबंध से हमारा लक्ष्य आसान हो गया है।

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