लखनऊ [हरिशंकर मिश्र]। प्रदेश सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष के चार महीने के लिए लेखानुदान के जरिये खर्च की व्यवस्था जरूर कर ली है लेकिन इस साल के आखिरी महीनों में वित्तीय संकट से जूझना उसके लिए चुनौती साबित होगी। इसके आसार अभी से नजर आने लगे हैं।

सूत्रों की मानें तो सबसे बड़ी समस्या राज्यकर्मियों के वेतन भुगतान को लेकर ही सामने आएगी जिसकी पिछले अनुपूरक बजट में उपेक्षा कर दी गई थी। इसके अलावा डीए, केंद्रीय कर्मियों के समान वेतन भत्ते देने आदि मोर्चो पर भी इसे जूझना पड़ेगा।

फिलहाल प्रदेश सरकार के सामने सबसे बड़ा संकट तो राज्य के पंद्रह लाख से अधिक कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की किश्त उपलब्ध कराना ही है, जिसे हर हाल में दिसंबर माह में उसे देना ही होगा क्योंकि अगले माह केंद्र सरकार अपने कर्मियों के लिए डीए की नई किश्त का एलान कर सकती है।

माना जा रहा है कि सरकार दिसंबर पेड जनवरी के रूप में इसकी घोषणा करेगी। इस मद में सरकार को लगभग साढ़े चौदह सौ करोड़ रुपये का व्ययभार बर्दाश्त करना पड़ेगा। आईएएस को यह भत्ता दिया जा चुकता है, लेकिन राज्यकर्मियों को अब तक नहीं मिला। कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के प्रवक्ता बीएल कुशवाहा कहते हैं कि महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों के लिए अब तक डीए की किश्त जारी कर दी जानी चाहिए थी। इस किश्त को मिलाकर प्रदेश में राज्यकर्मियों का डीए 58 प्रतिशत हो जाएगा हालांकि बजट में इसके लिए 45 प्रतिशत की ही व्यवस्था की जाती है। मान लिया जाता है कि विभागों के रिक्त पदों से बचने वाली राशि से इसकी भरपाई हो जाएगी।

बीते अगस्त माह में अनुपूरक बजट लाए जाने के साथ ही इस आशंका को बल मिलने लगा था कि आगे चलकर कई विभागों को वेतन मद के लाले पड़ सकते हैं। सरकार को भी इसकी आशंका थी इसलिए उसने इसी समय से इस बाबत सोच-विचार शुरू कर दिया था। 25 अगस्त को ही प्रमुख सचिव वित्त ने सभी विभागों को पत्र भेजकर आगाह कर दिया था कि राजस्व पक्ष के आयोजनेत्तर या आयोजनागत योजनाओं में यदि अनुप्रयुक्त राशि हो तो वेतन, महंगाई भत्ते व अन्य भत्तों के मद में उसके पुनर्विनियोग का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जाए।

अक्टूबर माह में भी सचिव वित्त बीएम जोशी ने 31 मार्च की स्थिति के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की संख्या व वेतन का ब्योरा मांगा था लेकिन अधिकांश विभागों ने उसे उपलब्ध नहीं कराया था। अंतत: नवंबर माह में इसके लिए पुन: पत्र जारी किया गया।

सूत्रों के अनुसार राज्यकर्मियों को वित्तीय स्तरोन्नयन [एसीपी] दिए जाने से कई विभागों में वेतन की समस्या उभरी है। कुछ विभागों ने इसे मनमाने ढंग से बांट दिया और बाद में अनुपूरक बजट में और राशि की मांग की। लेकिन उन्हें एक चौथाई राशि भी नहीं मिल पाई।

अब सब पुनर्विनियोग का रास्ता निकालने में जुटे हैं। इस बीच राज्यकर्मियों और शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर भी सरकार पर दबाव बनाया है। यदि सरकार मांगों को स्वीकार करती है, तो उस पर और भी वित्तीय दबाव बनेगा। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रामजी अवस्थी कहते भी हैं कि हमने अपनी मांगों से सरकार को अवगत करा दिया है। अब बारी सरकार की है।

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