जागरण न्यूज नेटवर्क, लखनऊ। चर्चित निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को शुक्रवार को फिर से उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में राज्यपाल बीएल जोशी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई। शपथ लेने के बाद राजा भैया ने विश्वास जताने के लिए मुलायम और अखिलेश के प्रति आभार जताया। उन्होंने मीडिया से अपनी कार्यशैली की समीक्षा का भी आग्रह किया जिसके चलते उन्हें कुंडा के डीएसपी हत्याकांड में दोषी के तौर पर पेश किया गया।

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दबंग छवि के राजा भैया को कुंडा डीएसपी जिया उल हक की हत्या के बाद चार मार्च को उप्र सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इससे पहले दिवंगत डीएसपी की पत्नी परवीन आजाद की तहरीर पर राजा भैया के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। बाद में अखिलेश सरकार ने मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी। सीबीआइ ने कई महीने चली जांच और नार्को टेस्ट के बाद राजा भैया को मामले में पाक साफ करार दिया। लेकिन दिवंगत डीएसपी की पत्नी ने सीबीआइ के कदम के खिलाफ विरोध पत्र दिया हुआ है।

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सीबीआइ के पाक साफ करार दिए जाने के बाद से ही उत्तर प्रदेश सरकार में राजा भैया की वापसी का इंतजार किया जा रहा था। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद उपजे राजनीतिक हालात और ठाकुर मतदाताओं के सरकार विरोधी रुख को देखते हुए राजा भैया की वापसी को अंजाम दिया गया। हालांकि राजा भैया ने इस उद्देश्य से इन्कार करते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव जाति आधारित राजनीति नहीं करते, इसलिए मंत्रिमंडल में उनकी वापसी को लेकर यह कयास सही नहीं है।

खुद पर चल रहे आठ आपराधिक मामलों को पूर्व की बसपा सरकार की देन ठहराते हुए राजा भैया ने कहा कि डीएसपी हत्याकांड में भी साजिश के तहत उनका नाम जोड़ा गया था। सवाल के जवाब में उन्होंने साजिशकर्ता का नाम बताने से इन्कार कर दिया। कुरेदे जाने पर साजिशकर्ता के तौर पर किसी कांग्रेसी के होने की संभावना से उन्होंने इन्कार नहीं किया।

परवीन ने वापसी पर जताया एतराज

प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव में मारे गए डीएसपी जिया उल हक की पत्‍‌नी परवीन आजाद ने राजा भैया को दोबारा मंत्री बनाए जाने पर सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की है। कहा कि सरकार ने अदालत के फैसले का इंतजार तक नहीं किया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि जो पैमाना रघुराज के लिए रखा गया वही मंत्री आजम खां के लिए भी होना चाहिए।

मुजफ्फरनगर दंगे के संबंध में लगे आरोप के सिलसिले में आजम को फौरन इस्तीफा देना चाहिए। निर्दोष पाए जाने पर उनकी भी वापसी हो सकती है जैसे राजा भैया वापस लौटे हैं।

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