नई दिल्ली, पीटीआइ। भारतीय सिपाही चंदू चव्हाण ने कहा कि फोर्स में 'उत्पीड़न' के कारण वह सेना को छोड़ रहे हैं। बता दें कि चव्हाण 2016 में गलती से पाकिस्तान पहुंच गए थे। हालांकि, सेना ने उनके आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, कहा कि वह एक अपराधी है और उसके खिलाफ विभिन्न अपराधों के लिए पांच अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई है। सिपाही ने कहा, 'जब से मैं पाकिस्तान से वापस आया हूं, मुझे सेना में लगातार परेशान किया जाता रहा है और मुझे संदेह की नजर से देखा जा रहा है, इसीलिए मैंने पद छोड़ने का फैसला किया।' चव्हाण ने अहमदनगर में अपने यूनिट कमांडर को अपना त्याग पत्र भेजा है, उनके करीबी सूत्रों ने कहा।

देर शाम आए एक बयान में, सेना ने बताया कि हाल ही में इकाई (unit) लाइनों में नशे में पाए जाने के बाद चव्हाण के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई, लेकिन वह इकाई से फरार हो गया। कहा गया कि चव्हाण को तीन अक्तूबर से तत्काल प्रभाव से 'बिना अवकाश के अनुपस्थित' घोषित किया गया था। कई बार काउंसलिंग और भारतीय सेना द्वारा उसके पुनर्वास के प्रयास भी उसके भावुक और शिकायती लहजे के चलते बेकार ही गए।

फोर्स द्वारा कहा गया कि सेना किसी भी परिस्थिति में इस प्रकृति की अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं करेगी। यूनिट को समय से पहले छुट्टी देने के लिए भी नहीं कहा गया है। बता दें कि चव्हाण सीमा पार कर गए थे, जहां उन्हें पाकिस्तान रेंजर्स ने पकड़ लिया और भारत को सौंपने से पहले चार महीने तक उन्हें प्रताड़ित किया गया।

पिछले महीने, चव्हाण का एक्सीडेंट भी हो गया, जिसमें उनके चेहरे और सिर पर गहरी चोट आई, जहां वे अस्पताल में भर्ती रहे। हादसा तब हुआ जब वह बिना हेलमेट के अपने दोपहिया वाहन पर सवार थे और धुले जिले के अपने गृह नगर बोहरिवीर के पास एक गड्ढे में जा गिरे। सेना ने अपने बयान में कहा कि उसे चव्हाण के खिलाफ धुले नागरिक प्रशासन से पिछले आम चुनाव के दौरान 'सक्रिय रूप से प्रचार करने' के लिए शिकायत मिली थी जो मीडिया में भी रिपोर्ट की गई थी।

 

Posted By: Nitin Arora

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