नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। विश्वविद्यालय या कालेज अब सिर्फ डिग्री और डिप्लोमा देने तक ही खुद को सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि छात्रों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने में भी मदद करेंगे। इसके लिए प्रत्येक विवि में एक सेल गठित होगा। जो प्रत्येक छात्र की रुचि और पढ़ाई के लिहाज से उसके भविष्य की रूपरेखा तैयार करेगा। फिलहाल इस काम में विश्वविद्यालय अपने ऐसे पूर्व छात्रों की मदद लेगा, जो अपने क्षेत्र में काफी ऊंचाई पर है।

गुणवत्ता में सुधार की दिशा में बड़ी पहल 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर एक नीति तैयार की है, जिसे 'छात्र कैरियर प्रोन्नति और पूर्व विद्यार्थी नेटवर्क' नाम दिया गया है। फिलहाल इसे अंतिम रुप देने की तैयारियां चल रही है। हालांकि इससे पहले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों की राय मांगी गई है। यूजीसी के मुताबिक राय देने की अंतिम तारीख 22 नवंबर तक की तय की गई है। वहीं यूजीसी की इस पहल को विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में बड़ी पहल मानी जा रही है।

भविष्य की राहें होंगी आसान 

प्रस्तावित नीति के तहत छात्रों को कोर्स को ऐसे ढंग से फ्रेम किया जाएगा, कि जिससे उनके भविष्य की राहें आसान हो सके। इसके साथ ही उन्हें रुचि के मुताबिक तय मंजिल तक पहुंचाने का रास्ता भी सुझाया जाएगा। यानि आगे कौन-सी पढ़ाई और करनी होगी। साथ ही इससे किन-किन क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलेगा, आदि। नीति के मुताबिक प्रत्येक विवि और कालेजों में पूर्व छात्रों का एक डाटा बैंक भी तैयार होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उनसे आसानी से संपर्क किया जा सके।

छात्रों को कैरियर में सही दिशा देने की कोशि‍श

यूजीसी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा समय में देश में नौ सौ से ज्यादा विश्वविद्यालय और करीब 40 हजार कालेज है। जहां हर साल लाखों छात्र उच्च शिक्षा हासिल करके निकलते है। इनमें बड़ी संख्या में छात्र सही मार्गदर्शन न मिलने के चलते कैरियर में आगे नहीं बढ़ पाते है। यह पूरी कोशिश छात्रों के कैरियर को सही दिशा देने को लेकर ही है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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