नई दिल्ली, जयप्रकाश रंजन। बिहार में सुशासन और विकास की फिर से वापसी के दावे के साथ जदयू और भाजपा ने हाथ मिलाया तो पहले दिन से ही पीएम नरेंद्र मोदी की उस घोषणा को पूरा करने की ओर कदम बढ़ने लगा है जो ऐन चुनाव के वक्त किया गया था। पीएम ने डेढ़ लाख करोड़ की योजना की घोषणा की थी। केंद्रीय मंत्रालय अभी से बिहार से संबंधित परियोजनाओं को लेकर चौक-चौबंद होने लगे हैं।

सूत्रों के मुताबिक बिजली, कोयला, खनन व रिनीवल मंत्री पीयूष गोयल राज्य में ऊर्जा क्षेत्र की जल्द ही समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक राज्य में नए बिजली मंत्री के बनने के बाद होगी, जिसमें राज्य की पूरे ऊर्जा ढांचे को और मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। वैसे राजनीतिक मतभेद के बावजूद नीतीश सरकार ने केंद्र की उदय योजना को स्वीकार किया था। बिजली मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में बिजली की कमी में पिछले तीन वर्षों में भारी कमी हुई है। वर्ष 2013-15 में राज्य में 4.1 फीसद बिजली की कमी थी जो अभी घट कर 2 फीसद रह गई है। राज्य में बिजली उत्पादन की क्षमता इन वर्षों में 64 फीसद बढ़ कर 3,607 मेगावाट का हो गया है।

पीएम मोदी ने पिछले चुनाव से पहले जो बिहार पैकेज की घोषणा की थी उसमें 21 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाएं पेट्रोलियम क्षेत्र की थी। गुरुवार सुबह उपमुख्यमंत्री की शपथ लेने के तुरंत बाद सुशील मोदी ने पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से बात की। प्रधान ने उन्हें 21,486 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को लागू करने में पूरी मदद देने का आश्वासन है। इसमें 879 किलोमीटर लंबी पेट्रोलियम पाइपलाइन परियोजनाओं (पटना-मोतीहारी-बैतलपुर, मोतीहारी-अमलेकगंज, हल्दिया-बरौनी व पारादीप-हल्दिया) को समयबद्ध कार्यक्रम के तहत पूरा किये जाने की तैयारी चल रही है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि पीएम उज्ज्‍वला योजना के तहत जितने भी योग्य आवेदन आये हैं उन्हें जल्द से जल्द एलपीजी कनेक्शन दिए जाएंगे। इस योजना के तहत बिहार में 58 लाख आवेदन अभी तक आये हैं जिनमें से 45 लाख क्लियर किये गये हैं और 36 लाख कनेक्शन दे दिए गए हैं। दिसंबर, 2017 तक सभी शेष आवेदनों का सत्यापन कर योग्य उम्मीदवारों को कनेक्शन मिल जाएगा।

बिहार अभी भी एलपीजी कनेक्शन के मामले में देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शामिल है। राष्ट्रीय औसत के मुताबिक 61 फीसद रसोई घरों में एलपीजी कनेक्शन हैं, जबकि बिहार में सिर्फ 50 फीसद घरों को यह कनेक्शन मिला है। योजना यह है कि अगले चुनाव से पहले राज्य के 95 फीसद घरों में साफ सुथरी एलपीजी से खाना पकने लगे।

केंद्र सरकार के स्तर पर केंद्रीय परियोजनाओं को लेकर बेहद सक्रियता दिखाने के पीछे एक वजह यह भी है कि अब वे केंद्र के साथ ही राज्य में भी सत्ता में होंगे। ऐसे में परियोजनाओं की देरी के लिए वह कोई और बहाना नहीं बना सकेंगे। बिहार पैकेज के तहत 1,25,000 लाख करोड़ रुपये की योजनाओं का ऐलान किया था। इसमें सबसे ज्यादा 54,713 करोड़ रुपये की परियोजनाएं सड़क व राजमार्ग से जुड़ी हुई थीं। इसके तहत गंगा, सोन व कोसी पर तीन नए पुल और 12 नए रेल ब्रिज बनाना है। इनकी प्रगति बहुत धीमी है। ऐसे में सरकार को इन परियोजनाओं को लेकर सबसे ज्यादा तेजी दिखानी पड़ेगी।

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Posted By: Tilak Raj

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