नई दिल्ली, पीटीआइ। केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी ने शनिवार को कहा कि 10वीं शताब्दी की योगिनी देवी की मूर्ति भारत लाई जा रही है। बकरी के सिर वाली बलुआ पत्थर की यह मूर्ति 40 साल पहले बांदा जिले के एक मंदिर से चोरी चली गई थी। एक दिन पहले ही लंदन में भारतीय उच्चायुक्त को यह मूर्ति सौंपी गई थी। पिछले साल अक्टूबर में ही इंग्लैंड के एक बगीचे में यह मूर्ति मिली थी।

यह मूर्ति बुंदेलखंड के बांदा जिले के लोखारी गांव स्थित मंदिर में स्थापित योगिनी का एक हिस्सा है। योगिनी देवी को तांत्रिक परंपरा की देवी माना जाता हैा। वापस लाए जाने के बाद इस मूर्ति को नई दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के हवाले कर दिया जाएगा।

संस्कृति मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि नई दिल्ली स्थित भारतीय संग्रहालय की तरफ से 1986 में विद्या दहेजिया ने योगिनी देवियों की परंपरा पर अध्ययन किया था। बाद में 'योगिनी पंथ एवं मंदिर : एक तांत्रिक परंपरा' के नाम से इसका प्रकाशन भी हुआ था। इस मूर्ति को 1988 में लंदन में आर्ट बाजार में देखा गया था। पिछले साल अक्टूबर में भारतीय उच्चायोग को इस मूर्ति के इंग्लैंड के बगीचे में पाए जाने की सूचना मिली थी।

शुक्रवार को लंदन में भारत की उच्चायुक्त गायत्री इस्सर कुमार ने यह प्राचीन मूर्ति स्वीकार की थी। इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट, सिंगापुर और आर्ट रिकवरी इंटरनेशनल, लंदन ने भारतीय उच्चायोग, लंदन को मूर्ति की पहचान और उसकी रिकवरी में तेजी से सहायता की, जबकि भारतीय उच्चायोग ने स्थानीय और भारतीय अधिकारियों के साथ आवश्यक दस्तावेज तैयार किए।

बता दें कि भैंस के सिर वाली वृषणा योगिनी की इसी तरह की एक मूर्ति फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित भारतीय दूतावास द्वारा 2013 में बरामद की गई थी। इस मूर्ति को भी लोखरी गांव के उसी मंदिर से चुराई गई थी, जहां से बकरी के सिर वाली मूर्ति चुराई गई थी। वृषण योगिनी की मूर्ति को सितंबर 2013 में नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में स्थापित किया गया था।