नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। स्वच्छ जलापूर्ति के लिए सरकार एक हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिससे 27500 गांवों को दूषित जलापूर्ति से मुक्ति दिलाने में मदद मिलेगी। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत आयोजित समारोह में स्वजल योजना में सुधार पर चर्चा हुई। राज्यों के पेयजल मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श में केंद्रीय पेयजल मंत्री उमा भारती ने कहा कि देश के 115 पिछड़े जिलों में स्वजल योजना लांच की जाएगी। स्वजल योजना पर कुल 700 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

उनका कहना था कि देश में साढ़े 27 हजार गांव ऐसे हैं, जहां का पेयजल दूषित है। इसमें आर्सेनिक व फ्लूराइड समेत कई और जहरीले तत्व घुले हुए हैं। सरकार ने इन गांवों को इस गंभीर समस्या से मुक्त करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये की योजना तैयार की है।

पेयजल मंत्रियों के सम्मेलन में देश के कुल 13 राज्यों के मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इसमें बिहार, असम, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड प्रमुख हैं। राज्यों के प्रतिनिधियों ने स्वच्छ पेयजल आपूर्ति पर अपनी राय रखी।

उमा भारती ने कहा कि इन गांवों में जलापूर्ति के लिए पाइप से आपूर्ति करने पर जोर दिया जाएगा, जिसे सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा। स्वजल योजना के संचालन और उसके रखरखाव में गांवों के सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा।

भारती ने जलापूर्ति की गुणवत्ता को जांचने के लिए दो हजार परीक्षण प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण करने की घोषणा की। उन्होंने राज्यों के मंत्रियों से कहा कि वे अपने यहां पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी गंभीरता से करें। मानसून सीजन के मद्देनजर भारती ने जोर देकर कहा कि बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग जरूर करें। कार्यक्रम में पेयजल सचिव परमेश्वरन अय्यर ने ब्योरा दिया।

Posted By: Vikas Jangra