नई दिल्‍ली, पीटीआइ। अगर आपका कोई रिश्तेदार विदेश में रहता है तो वह बिना किसी रुकावट के आपको साल में 10 लाख रुपये तक भेज सकता है। इसके लिए आपको किसी सरकारी विभाग या प्रशासनिक इकाई को सूचना देने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। पहले यह अंशदान की यह सीमा एक लाख रुपये थी। सरकार ने इसके लिए मौजूदा विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए), 2011 के नियमों में सात बदलाव किए हैं। बदले हुए नियम एक जुलाई से प्रभावी हो गए हैं।

  • विदेश में रहने वाले रिश्तेदार अब बिना रुकावट भेज सकेंगे 10 लाख रुपये
  • अब प्रशासनिक मद में विदेशी चंदे की 20 प्रतिशत से ज्यादा रकम खर्च करने की अनुमति नहीं

सरकारी अधिकारी विदेशी सहयोग नहीं ले सकेंगे

संशोधित एफसीआरए में सरकारी अधिकारियों के विदेशी अंशदान लेने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही एनजीओ के हर पदाधिकारियों के लिए आधार जमा कराना अनिवार्य बना दिया गया है।

90 दिन के भीतर देनी होगी सूचना

नए नियमों के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक गजट अधिसूचना के माध्यम से शुक्रवार की रात विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2022 को अधिसूचित किया गया। अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अगर विदेशी अंशदान की रकम 10 लाख रुपये से अधिक होगी तो प्राप्तकर्ता 90 दिन के भीतर उसकी सूचना सरकार को दे सकता है, पहले 30 दिन में ही सूचना देने का प्रविधान था। इसके लिए नियम छह में बदलाव किया गया है।

NGO को FCRA के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य

नए नियमों के मुताबिक विदेशी चंदा हासिल करने वाले संगठन प्राप्त धनराशि का 20 प्रतिशत से अधिक रकम प्रशासनिक कार्यों के लिए खर्च नहीं कर सकते हैं। पहले यह सीमा 50 प्रतिशत धनराशि की थी। विदेश से चंदा प्राप्त करने वाले सभी गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

बैंक खाते में बदलाव की देनी होगी जानकारी

इसी तरह विदेशी अंशदान से संबंधित बैंक खातों से जुड़े नियम नौ में भी बदलाव किया गया है। अगर विदेश से मिलने वाले धन और उसके उपयोग से जुड़े बैंक खाते में किसी तरह का बदलाव किया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों, संगठनों या एनजीओ को केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसकी सूचना 45 दिन में देनी होगी, पहले यह समय 30 दिन का था।

हर तिमाही दान से संबंधित जानकारी देने की बाध्यता खत्म

नियम 13 के प्रविधान 'बी' को हटा दिया गया है। इसके तहत विदेशी चंदे से संबंधित पूरी जानकारी हर तिमाही सरकार को देनी होती थी, जिसमें दानदाताओं, दान में मिली रकम, धनराशि मिलने की तारीख इत्यादि शामिल थी।

नौ महीने के भीतर देनी होगी बैलेंस शीट की रिपोर्ट

अब एफसीआरए के तहत विदेशी सहयोग हासिल करने वाले व्यक्ति को पूरा हिसाब-किताब और बैलेंस शीट की आडिट रिपोर्ट प्रत्येक वित्तीय वर्ष के बाद नौ महीने के भीतर अपनी आधिकारिक वेबसाइट या केंद्र द्वारा नामित वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। विदेशी चंदा हासिल करने वाले व्यक्तियों या एनजीओ को हर तिमाही अब अपनी वेबसाइट पर भी प्राप्त चंदे के बारे में जानकारी देने की बाध्यता भी नहीं होगी।

Edited By: Krishna Bihari Singh